jhankar
ब्रेकिंग
हरदा में बलाई महासभा ने उठाया बड़ा मुद्दा: “अपना स्थान नहीं तो समाज के कार्यक्रम कैसे हों?” प्रशासन ... हरदा कृषि उपज मंडी में हर्षोल्लास से मनाया गया 80वां स्वतंत्रता दिवस हंडिया : तिरंगे के बीच बच्चों संग बैठा प्रशासन, खेड़ीनीमा स्कूल में दिखी अलग तस्वीर,, MP Weather Update 16 अगस्त 2026: मध्य प्रदेश में बारिश का दौर जारी, कई जिलों में अलर्ट हंडिया : चारों धाम और बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर लौटे खत्री परिवार के सदस्य,,, एसडीएम कार्यालय को स्वतंत्रता दिवस पर मिला तृतीय पुरस्कार   हरदा में 15 अगस्त को ध्वजारोहण की जगह फहराया गया तिरंगा, CM राइज स्कूल में भी सामने आया मामला पिछले... अखंड भारत संकल्प दिवस 14 अगस्त पर रहटगाँव में स्थायी ध्वज एवं अखंड भारत चौक की स्थापना भोपाल में 80वां स्वतंत्रता दिवस: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लाल परेड ग्राउंड पर किया ध्वजारोहण , द... हरदा जिले की हलचल न्यूज अपडेट 15 अगस्त 2026 शनिवार

मां वैष्णो देवी सच्ची श्रद्धा से आने वाले भक्तों की मनोकामना पूरी करती है। पहाड़ों के बीच मां का स्थान प्रतिदिन लगी रहती है लाखों की भीड़, वैष्णो देवी धाम से लौटकर के के यदुवंशी की खास रिपोर्ट

के के यदुवंशी सिवनी मालवा।जम्मू में बना मां वैष्णो देवी का मंदिर पूरे देश में एक अलग पहचान बनाई है यहां सच्ची श्रद्धा से आए भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है पहाड़ों के ऊपर स्थित वैष्णो देवी की चढ़ाई लगभग 15 सो किलोमीटर है लेकिन भक्त इतनी आसानी से चढ़ जाते हैं कि उन्हें पता ही नहीं चलता और मां का दरबार आ जाता है ।

कहा जाता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से हर किसी की मनोकामना पूरी हो जाती है. हर साल यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं. माता का ये मंदिर पहाड़ की एक चोटी पर बना हुआ है. जहां पर कई मील की यात्रा करने के बाद ही भक्त माता के दर्शन कर पाते हैं मंदिर की खासियत और वैष्णव माता की कथा के बारे में जानकारों ने बताया कि भव्य मंदिर का निर्माण करीब 700 साल पहले पंडित श्रीधर ने बनवाया था पंडित श्रीधर वैष्णवी माता के बहुत बड़े भक्त थे. यही वजह है कि एक दिन माता उनकी भक्ति से खुश होकर उनके सपने में आईं और बोलीं कि बोली-हे वत्स तुम माता वैष्णो के निमित्त एक भंडारा करो. इतना कहकर माता अंतर्ध्यान हो गई ।

- Install Android App -

इसके बाद अगली सुबह पंडित श्रीधर ने इस सपने की बात अपने परिवारवालों को बताई और फिर भंडारे का आयोजन किया गया. पंडित श्रीधर बहुत ही गरीब थे, इसलिए वो भंडारे में आई भक्तों की भीड़ को देखकर चिंतित हो गए. कहा जाता है कि उनके इस भंडारे में एक बालिका शामिल थी, जो भक्तों को प्रसाद बांट रही थी.वहीं जब भक्त बालिका से उनका नाम पूछ रहे थे तो बालिका ने अपना नाम वैष्णवी बताया. जब तक भंडारा चला वैष्णवी वहां मौजूद रहीं और फिर अंतर्ध्यान हो गईं. ।

जब पंडित श्रीधर वैष्णवी से मिलने को व्याकुल हो उठे, तो उन्होंने भक्तों से बालिका के बारे में पूछा-कहां गई वैष्णवी उस समय किसी ने वैष्णवी की जानकारी नहीं दी.इसके बाद पंडित श्रीधर कई दिनों तक बालिका वैष्णवी को ढूंढते रहें, लेकिन वो उन्हें कभी नहीं देखा फिर एक रात पंडित के सपने में आकर उस बालिका वैष्णवी ने बताया कि वो ही माता वैष्णवी है सपने में माता ने उन्हें त्रिकूट पर्वत पर स्थित गुफा के बारे में भी बताया. फिर पंडित श्रीधर ने गुफा ढूंढकर माता वैष्णो की पूरी विधि-विधान से पूजा-अर्चना की. उस वक्त से माता वैष्णव की पूजा जारी है बड़ी ही दूर-दूर से भक्त यहां आते हैं।