मप्र. में रेत का काला कारोबार निरंतर जारी है…… जिसे रोक पाना असंभव है।प्रशासन की नाक के नीचेे ही यह कार्य बदस्तूर जारी हैं। कार्यवाही के नाम पर कभी कभार कुछ वाहनों को पकड़़कर जब्ती बनाई जाती है। फिर उसे छोड़ दिया जाता हैं। वाहन मालिको के राजनीति रसूख के चलते उन पर सीधे कार्यवाही भी नही की जाती है।मप्र में छोटी बड़ी सभी नदियों का दोहन बेहिसाब किया जा रहा है। जो कि पर्यावरण की दृष्टि से भी बहुत दुखदायी होने वाला है।इस बात से सरकार और सरकार के नुमाइंदे अनभिज्ञ नही है मगर निजी स्वार्थ के चलते नदियों से रेत निकालने का ठेका दे दिया जाता है।ठेकेदार को जब ठेके महंगे लगे या उसे किसी को अतिरिक्त खर्च करने पडे़ तो वह गाईडलाइन को दरकिनार कर रेत का ज्यादा खनन करता है और अपना क्षेत्र छोड़ दूसरी जगह से मनमानी रेत निकालने लगता है।
ग्वालियर में रेत के अवैध उत्खनन, परिवहन से लेकर महंग दामों पर रेत की सप्लाई के मामले में खनिज विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। नौबत यह है कि लोगों को 10 से 15 हजार रुपये महंगी रेत खरीदना पड़ रही है। रेत के वैध अवैध घाटों पर क्या हो रहा है,कोई देखने वाला नहीं है। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सोमवार को जिला खनिज अधिकारी ने अमले के साथ हस्तिनापुर और सिरोल सहित तीन से चार स्थानों पर आठ रेत व गिटटी के वाहनों को पकड़ा। इनके पास रायल्टी भी नहीं मिली। केस दर्ज कर लिया गया है। रेत के अवैध उत्खनन व परिवहन के कारण जनता को महंगी रेत बेची जा रही है। रेत के डंपर से लेकर ट्रैक्टर ट्राली में हजारों रुपये की ज्यादा वसूली की जा रही है। इस मामले के खुलासे के बाद ही खनिज विभाग का अमला सक्रिय हो गया और कार्रवाई शुरू कर दी।

