केंद्रीय जेल के कैदियों द्वारा बनाए 50 हजार ‘आटे के दीपक’ से जगमगाएगी मां नर्मदा
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 नर्मदापुरम | मां नर्मदा के पावन तट पर इस वर्ष नर्मदा प्रकटोत्सव (नर्मदा जयंती) का नजारा कुछ अलग और प्रेरणादायी होगा। कलेक्टर सुश्री सोनिया मीना के मार्गदर्शन में एक अनूठी पहल करते हुए केन्द्रीय जेल नर्मदापुरम के कैदियों ने पर्यावरण के अनुकूल 50 हजार दीपक तैयार किए हैं। ये दीपक प्लास्टिक या सिंथेटिक सामग्री के बजाय आटे और पत्तों से बनाए गए हैं।
प्रदूषण मुक्त नर्मदा का बड़ा संदेश
नदी संरक्षण और प्रकृति को प्रदूषण से बचाने के उद्देश्य से जेल प्रबंधन ने कैदियों को यह विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। अक्सर धार्मिक उत्सवों के दौरान प्लास्टिक और सिंथेटिक कागज के दीपकों से नदियों में प्रदूषण बढ़ता है। इसी को रोकने के लिए प्रशासन ने इस बार पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों पर जोर दिया है।
‘आटे के दीपक’ के दोहरे लाभ
केंद्रीय जेल के कैदियों द्वारा तैयार इन दीपकों की सबसे बड़ी विशेषता इनके लाभ हैं। सबसे बड़ी बात यहां प्रदूषण शून्य है,मतलब आटे और पत्तों से बने ये दीपक नदी के पानी में पूरी तरह घुल जाते हैं, जिससे जल प्रदूषण नहीं होता।
जलीय जीवों का आहार दीपक के जलने के बाद, पानी में घुला आटा मछलियों और अन्य जलीय जीवों के लिए पौष्टिक आहार बन जाता है।
नवाचार आस्था और जागरूकता
प्राशासन द्वारा की जा रही यह यह पहल स्थानीय नागरिकों को जागरूक करने का एक प्रयास है कि वे भी मां नर्मदा को स्वच्छ रखने में अपना योगदान दें।
कैदियों में सकारात्मक परिवर्तन और निःशुल्क वितरण
जेल प्रबंधन के अनुसार, कैदी इस कार्य को पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ कर रहे हैं। मां नर्मदा के प्रति भक्ति भाव उनके मानसिक सुधार और सकारात्मकता में भी वृद्धि कर रहा है।
निःशुल्क प्रदाय: ये 50 हजार दीपक नर्मदा जयंती महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।
जेल प्रबंधन द्वारा ही आटे और पत्तों जैसी कच्ची सामग्री उपलब्ध कराई गई है, ताकि इस नेक कार्य में कोई बाधा न आए।
जल संरक्षण की दिशा में अनूठा प्रयास
कलेक्टर सुश्री सोनिया मीना की इस पहल को स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों द्वारा काफी सराहा जा रहा है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक के उपयोग को हतोत्साहित करना और नर्मदा की अविरल एवं निर्मल धारा को प्रदूषण मुक्त रखना है।
“यह सिर्फ दीपक बनाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि कैदियों के समाज के प्रति योगदान और पर्यावरण संरक्षण की एक बड़ी मिसाल है। इससे जल संरक्षण के प्रति जागरूकता आएगी।” – *जिला प्रशासन, नर्मदापुरम*

