मकड़ाई एक्सप्रेस 24 इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में अब जमीन के प्रस्ताव को लेकर बड़ा बदलाव हो रहा है। जिला प्रशासन अब पारंपरिक सचिवालय की जगह आर्टिफिशियल स्टेट्स (एआई) और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग कर जमीन का वास्तविक आकलन करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
तकनीकी मॉडल से क्या बदलाव ?
अब तक जमीन की पटकथा मुख्य रूप से पिछले साल हुई राजिस्ट्रियों के आधार पर तय की गई थी। लेकिन नए अपडेट के अनुसार एआई मॉडल यह देखेगा कि किन क्षेत्रों में नई सड़कें, टिकटें या परमाणु परियोजनाएं आती हैं।
सैटेलाइट से जमीन की पहचान
सैटेलाइट के माध्यम से उन खाली जमीनों की पहचान की जाएगी जो अब विकसित हो चुके हैं, ताकि वहां के सैटेलाइट बाजार की कीमत के करीब रखा जा सके। इस तकनीक से बंदरबांट और गलत तरीके से रेटेड कम-ज्यादा करने की मंजूरी खत्म हो जाएगी।
किन इलाकों में होगा असर ?
औद्योगिक सर्वेक्षण के अनुसार, इंदौर जिले में 3000 से अधिक बच्चे ऐसे हैं, जहां विकास का निरीक्षण किया जा रहा है और वहां पर लगभग तय मनी जा रही है। मुख्य रूप से इन इलाकों पर प्रभावशाली भी:
सुपर शोरूम और बायपास – यहां लगातार बढ़ रहे आईटी पार्क और आवासीय परियोजनाओं के कारण नामांकन में वृद्धि हो सकती है।
मेट्रो रूट से लगे क्षेत्र
इंदौर मेट्रो के आस-पास की जमीनों पर होटलों का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है। शहर की सीमा में शामिल नए इलाकों में भी अब शहरीकरण के खाते से बदलाव प्रस्तावित है।
पोर्टफोलियो और राजस्व में लाभ की उम्मीद
इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य भूमि की खरीद-फरोख्त में प्लाट लाना है। कई बार प्राइम एज़ियोडेशन पर भी पुरानी संपत्तियों के कारण सरकार को राजस्व का नुकसान होता है। इस नई व्यवस्था पर आधारित इस नई व्यवस्था से न केवल सरकारी रेटिंग में बढ़ोतरी होगी, बल्कि आम फिल्मों को भी क्षेत्र के वास्तविक विकास के आधार पर सही कीमत पर गुणवत्ता मिल जाएगी।
अगला कदम: यह प्रस्ताव जल्द ही केंद्रीय मूल्यांकन समिति को भेजा जाएगा, जिसके बाद नई पात्रता लागू होने की तारीख घोषित की जाएगी।

