हंडिया : शहादत दिवस पर साल्याखेड़ी में उमड़ा जनसैलाब, वीर सपूत इलाप सिंह पटेल को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि
हंडिया। “शहीद कभी मरते नहीं, वे देश की मिट्टी में अमर हो जाते हैं…” कुछ ऐसा ही भाव शुक्रवार सुबह ग्राम साल्याखेड़ी में देखने को मिला, जब पूरे गांव ने अपने वीर सपूत इलाप सिंह पटेल को शहादत दिवस पर नम आंखों से याद किया।
शहीद स्मारक स्थल पर लगाए गए विशाल श्रद्धांजलि पोस्टर और प्रतिमा के सामने देशभक्ति का माहौल देखते ही बन रहा था। गांव में हर ओर गर्व और भावनाओं का संगम दिखाई दिया।
Central Reserve Police Force के असिस्टेंट कमांडेंट रोहतास कुमार, हवलदार इरशाद अहमद जिया, सिपाही कमल शंकर एवं सिपाही मुबारक हुसैन विशेष रूप से शहीद के पैतृक गांव पहुंचे। उन्होंने शहीद इलाप सिंह पटेल की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्पहार एवं श्रद्धासुमन अर्पित किए।
इसके बाद सीआरपीएफ अधिकारियों एवं जवानों ने शहीद परिवार से मुलाकात कर उनका सम्मान किया और कुशलक्षेम जानी। इस दौरान शहीद की माता हिरली बाई, पत्नी उमा बाई, बड़े भाई गुमान सिंह पटेल, भाभी सुकमा बाई एवं सुमन बाई मौजूद रहीं।
कार्यक्रम में हंडिया थाना प्रभारी आरपी कबरेती, सब इंस्पेक्टर अशोक अहिरवार व आरक्षक नितेश कुशवाह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान “भारत माता की जय” और “अमर शहीद इलाप सिंह अमर रहें” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। उपस्थित लोगों ने कहा कि गांव का यह वीर सपूत आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा।
बताया जाता है कि शहीद इलाप सिंह पटेल Central Reserve Police Force की 168वीं बटालियन में पदस्थ थे। 8 मई 2010 को 168 बटालियन की एक टुकड़ी अपनी कंपनी लोकेशन पर सुरक्षा सामग्री एवं जीवन रक्षक दवाइयां पहुंचाने के बाद बीजापुर स्थित मुख्यालय लौट रही थी। जवान बम निरोधक वाहन में सवार थे।
जैसे ही पार्टी बीजापुर घाटी क्षेत्र में पहुंची, घात लगाए बैठे माओवादियों ने वाहन को निशाना बनाकर भीषण आईईडी विस्फोट कर दिया और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि वाहन उसकी चपेट में आ गया और उसमें सवार सभी जवान गंभीर रूप से घायल हो गए।
गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए मोर्चा संभाला और माओवादियों को मुंहतोड़ जवाब दिया। जवानों के कड़े प्रतिरोध से माओवादी अपना ठिकाना छोड़कर भागने पर मजबूर हो गए। इस भीषण मुठभेड़ में बल के 8 वीर जवान मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए, जिनमें शहीद इलाप सिंह पटेल भी शामिल थे।
आज भी साल्याखेड़ी गांव अपने इस वीर सपूत के बलिदान पर गर्व करता है और उनकी शहादत हर युवा के भीतर देशसेवा की प्रेरणा जगाती है।

