श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिवस भक्ति में सराबोर हुए श्रद्धालु, रुक्मिणी विवाह प्रसंग ने किया भावविभोर ।
हरदा। वृंदावन स्थित सुदामा कुटी के भव्य शताब्दी महा-महोत्सव के तहत श्री सीताराम गार्डन सिविल लाइन थाने के पास बायपास रोड स्थित भवन में
चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिवस श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबे नजर आए। इस अवसर पर वृंदावन के पूज्य संत श्री शिवसेवकदास जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं के साथ रुक्मिणी विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
महाराज श्री ने कहा कि रुक्मिणी जी का भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण हमें सच्ची भक्ति का संदेश देता है। “भक्ति और समर्पण ही जीवन का सच्चा आधार है, सच्चे मन से किया गया प्रेम और विश्वास अंततः भगवान तक अवश्य पहुंचता है।” कथा के दौरान पूरा पंडाल “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा तथा श्रद्धालुओं ने आरती एवं प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
आयोजन से जुड़े हेमंत मोराने ने बताया कि मंगलवार के दिन इस पावन अवसर पर वृंदावन स्थित श्रीनाभापीठ सुदामा कुटी के पीठाधीश्वर, प्रख्यात संत एवं आध्यात्मिक गुरु श्री सुतीक्ष्ण दास देवाचार्य जी महाराज का हरदा आगमन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने कथा स्थल पर पहुंचकर अपने शिष्य श्री शिवसेवकदास जी महाराज के श्रीमुख से चल रही कथा में सहभागिता की तथा नाम दीक्षा एवं संकीर्तन के माध्यम से वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया।
इसी दौरान श्री सुतीक्ष्ण दास देवाचार्य जी महाराज ने सीताराम गार्डन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वृंदावन में आयोजित सुदामा कुटी के भव्य शताब्दी महा-महोत्सव की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि 10 से 20 जनवरी 2026 तक आयोजित इस महोत्सव में 108 कुंडीय श्रीराम महायज्ञ, संत सम्मेलन एवं विविध धार्मिक अनुष्ठानों का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें देशभर से संत-महात्माओं एवं हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
महाराज श्री ने कहा कि सुदामा कुटी की 100 वर्षों की यात्रा सेवा, साधना और सनातन धर्म के संरक्षण का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने समाज में आध्यात्मिक जागरूकता, एकता एवं संस्कारों के प्रसार पर विशेष बल देते हुए कहा कि “मानव-मानव एक है और हमें देश, समाज एवं सनातन धर्म के लिए समर्पित होकर कार्य करना चाहिए।”
पहली बार हरदा आगमन पर उन्होंने हरदा क्षेत्र की सराहना करते हुए कहा कि यह भूमि माँ नर्मदा का क्षेत्र और ओंकारेश्वर एवं महाकालेश्वर के आशीर्वाद से पावन है और यहां के लोग धर्म के प्रति अडिग एवं राष्ट्रभक्त हैं। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण को उन्होंने “स्वर्णिम काल” बताते हुए पूरे विश्व के लिए गौरव का विषय बताया।
पत्रकारों के सवाल पर गौ सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि “गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा मिलना चाहिए, गाय समस्या नहीं बल्कि समाधान है।” साथ ही उन्होंने माता-पिता के सम्मान, समाज में समरसता और राष्ट्रहित में जीवन जीने का संदेश दिया। रात्रि में भजन गायक सौमित्र दास जी की भजन संध्या ने समां बांध दिया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आयोजित श्रीमद भागवत कथा कार्यक्रम की प्रेरणा माता श्री पुष्पा मंगल जी मंगल परिवार द्वारा किया जा रहा है। आयोजकों ने आज अंतिम दिवस अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं से उपस्थित होकर धर्म लाभ लेने का आग्रह किया है।

