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सिंधु जल समझौता नेहरू की सबसे बड़ी गलतियों में से एक : पीएम मोदी

नई दिल्ली। एनडीए संसदीय दल की बैठक में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उपराष्ट्रपति पद के लिए एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन का परिचय कर उनकी जमकर तारीफ की। पीएम मोदी ने कहा कि राधाकृष्णन ओबीसी समाज से आने वाले जमीनी नेता हैं, जो सहज स्वभाव के हैं और राजनीति में खेल नहीं करते। उन्होंने राधाकृष्णन के लंबे सार्वजनिक जीवन और उनकी उपलब्धियों का जिक्र कर कहा कि वह सभी को साथ लेकर चलने वाले नेता हैं। इस मौके पर पीएम मोदी ने अपील की कि विपक्ष सहित सभी दल राधाकृष्णन को सर्वसम्मति से उपराष्ट्रपति पद के लिए समर्थन दें।

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बैठक में पीएम मोदी ने राधाकृष्णन के साथ अपने पुराने रिश्ते को भी याद किया। उन्होंने कहा कि हम तब से मित्र हैं जब हमारे बाल काले थे। जब राधाकृष्णन चुनाव लड़ रहे थे, तब मैं पार्टी का महासचिव था और उनकी चुनावी रैलियों की तैयारी करने की जिम्मेदारी मेरे ऊपर रहती थी। पीएम ने बताया कि राधाकृष्णन ने पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर और सांसद व राज्यपाल के रूप में हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है। उन्होंने कहा कि राधाकृष्णन का संसदीय और संवैधानिक मामलों का गहरा ज्ञान है, जो उन्हें उपराष्ट्रपति के पद के लिए एक प्रेरणादायक उम्मीदवार बनाता है।

इसी बैठक में पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की नीतियों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने 1960 के सिंधु जल समझौते को नेहरू की सबसे बड़ी गलतियों में से एक। पीएम मोदी ने कहा कि पूर्व पीएम नेहरू ने समझौते को बिना कैबिनेट और संसद की सहमति के हस्ताक्षर किया, इसके तहत भारत के 80 फीसदी जल को पाकिस्तान को दे दिया गया, जबकि भारत को केवल 20 फीसदी हिस्सा मिला। उन्होंने कांग्रेस नेता नेहरु के इस फैसले को किसान विरोधी और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ करार देकर कहा कि नेहरू ने बाद में अपने सचिव के माध्यम से गलती को स्वीकार किया था, लेकिन तब तक कोई फायदा नहीं हुआ।