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हरदा : जलकर वृद्धि पर भाजपा की बदलती भूमिका पर सवाल – अमर रोचलानी

हरदा : हरदा नगर पालिका परिषद की बैठक 29 अगस्त 2025 को आयोजित सामान्य सम्मेलन में जलकर की मासिक दर ₹75 से बढ़ाकर ₹200 करने का निर्णय भाजपा पार्षदों के द्वारा बहुमत से पारित किया गया। परिषद में यह कहा गया कि प्रति कनेक्शन लगभग ₹563 प्रतिमाह खर्च आ रहा है।

महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जलकर वृद्धि से संबंधित प्रस्ताव का संचालन स्वयं नगर पालिका उपाध्यक्ष अंशुल गोयल द्वारा किया गया था। इतना ही नहीं, ₹300 प्रतिमाह तक की वृद्धि का प्रस्ताव भी उनके द्वारा ही रखा गया था, जिसे बाद में ₹200 पर पारित किया गया।

उस समय कांग्रेस पार्षदों ने परिषद के अंदर स्पष्ट रूप से कहा था कि ₹75 से सीधा ₹200 करना अन्यायपूर्ण है।

कांग्रेस ने खुलकर इस प्रस्ताव का विरोध कर था और मांग रखी थी कि यदि दर बढ़ानी ही है तो उसे ₹100 प्रतिमाह किया जाए। यह बात परिषद की कार्यवाही में दर्ज है और उसके वीडियो प्रमाण भी उपलब्ध हैं।

अब वही उपाध्यक्ष सीएमओ को पत्र लिखकर दर कम करने या पुनर्विचार की बात कर रहे हैं।

यह प्रश्न स्वाभाविक है —

जब प्रस्ताव का संचालन भी आपने किया, ₹300 का सुझाव भी आपने दिया, और बहुमत से उसे पारित भी कराया, तो अब दर कम करने की मांग किस आधार पर की जा रही है?

क्या उस समय जनता की आर्थिक स्थिति अलग थी?

क्या उस समय जनभावनाओं की जानकारी नहीं थी?

यदि निर्णय बहुमत के आधार पर लिया गया था, तो उसकी जिम्मेदारी से पीछे हटना उचित नहीं है।

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अमर रोचलानी का बयान

नेता प्रतिपक्ष अमर रोचलानी ने कहा:

“कांग्रेस ने परिषद के भीतर स्पष्ट कहा था कि जलकर दर दर 75 ₹100 प्रतिमाह किया जाए। हमने विरोध भी किया, घेराव भी किया और लिखित आपत्ति भी दी। भाजपा ने अपने बहुमत का उपयोग कर ₹200 लागू किया। अब वही लोग पत्र लिखकर स्वयं को जनता का हितैषी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। यह दोहरी राजनीति है।”

उन्होंने आगे कहा:

“यदि वास्तव में दर कम करनी है तो परिषद की बैठक बुलाकर औपचारिक प्रस्ताव लाया जाए और जलकर ₹100 प्रतिमाह निर्धारित किया जाए। केवल पत्र लिखना पर्याप्त नहीं है।”

क्या भाजपा परिषद के भीतर ही मतभेद शुरू हो गए हैं?

क्या उपाध्यक्ष अब अपनी ही परिषद के निर्णय के खिलाफ खड़े हो रहे हैं?

क्या यह अध्यक्ष पर दबाव बनाने की आंतरिक राजनीति है?

या फिर यह केवल जनता के बीच सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास है?

कांग्रेस का रुख स्पष्ट है —

जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ स्वीकार नहीं किया जाएगा।