बेरोजगारों और अन्य पात्र लोगों को क्यों नहीं मिला मौका? किस नियम के तहत शासकीय जमीन पर टप रखने की जगह दी गई, जांच की मांग तेज
हंडिया। बस स्टैंड क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर प्रशासन के निरीक्षण और पंचनामा कार्रवाई के बाद अब नेशनल हाईवे किनारे मुर्गा-मछली मार्केट के सामने टप रखने के लिए जगह देने का मामला चर्चा में है। यहां पहले दो टप रखे गए थे, जिनकी संख्या बढ़कर चार हो गई। अब सवाल उठ रहे हैं कि ग्राम पंचायत ने आखिर दो दुकानदारों को टप रखने के लिए जगह किस अधिकार और किस नियम के तहत दी?
हाल ही में राजस्व अमले के निरीक्षण के दौरान दो दुकानदारों ने बताया कि उन्हें संबंधित जगह ग्राम पंचायत द्वारा आवंटित की गई है। इस बयान के बाद पंचायत की भूमिका और आवंटन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि पंचायत ने वास्तव में जगह दी है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि इसके लिए पंचायत में कौन-सा प्रस्ताव पारित हुआ और क्या सार्वजनिक निविदा या आवेदन प्रक्रिया अपनाई गई थी?
बिना निविदा दो लोगों को कैसे मिला मौका?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ग्राम पंचायत ने बिना निविदा या सार्वजनिक सूचना जारी किए ही दो दुकानदारों को टप रखने के लिए जगह दे दी? यदि ऐसा हुआ है तो इसकी प्रक्रिया और वैधानिक आधार की जांच जरूरी है। नगर में कई बेरोजगार और छोटे व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक लोग हैं। ऐसे में अन्य लोगों को आवेदन करने और समान अवसर पाने का मौका क्यों नहीं दिया गया?
आरक्षण और पात्रता के आधार पर अवसर क्यों नहीं?
यदि शासकीय जमीन पर रोजगार के उद्देश्य से जगह उपलब्ध कराई जा रही थी, तो क्या पात्रता और लागू आरक्षण संबंधी प्रावधानों पर विचार किया गया? क्या सभी इच्छुक लोगों से आवेदन बुलाए गए थे? यदि नहीं, तो चयन की प्रक्रिया क्या थी? इन सवालों का जवाब पंचायत को देना चाहिए।
जमीन किस विभाग की, पंचायत को आवंटन का अधिकार था या नहीं?
संबंधित जगह नेशनल हाईवे की सीमा में आती है या राजस्व विभाग की शासकीय भूमि है अथवा पंचायत के अधिकार क्षेत्र में, यह राजस्व रिकॉर्ड और सीमांकन से स्पष्ट होना चाहिए। यदि जमीन किसी दूसरे विभाग की है, तो ग्राम पंचायत द्वारा टप रखने के लिए जगह देने का अधिकार किस आधार पर इस्तेमाल किया गया, इसकी भी जांच जरूरी है।
गौरतलब है कि इस मामले को मकड़ाई एक्सप्रेस 24 ने 9 अगस्त 2026 को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया था। शिकायतों के बाद प्रशासनिक निरीक्षण हुआ, लेकिन अब केवल निरीक्षण नहीं, बल्कि आवंटन से जुड़े दस्तावेजों की जांच और स्पष्ट कार्रवाई जरूरी है।
पंचायत और प्रशासन से जवाब की अपेक्षा
अब ग्राम पंचायत को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उसने दो दुकानदारों को टप रखने के लिए जगह दी है? यदि हां, तो किस नियम, प्रस्ताव और सक्षम अधिकारी की अनुमति के आधार पर? क्या इसके लिए निविदा या सार्वजनिक आवेदन प्रक्रिया अपनाई गई थी? वहीं राजस्व विभाग को भूमि की वास्तविक स्थिति और स्वामित्व स्पष्ट करना चाहिए।
मामले की निष्पक्ष जांच कर यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि आवंटन नियमों के तहत हुआ है या नहीं। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
अब सवाल सिर्फ चार टपों का नहीं, बल्कि शासकीय जमीन के उपयोग, पंचायत के अधिकार और बेरोजगारों को समान अवसर देने का है।

