इंदौर। दूषित पानी से 18 मौतों के साथ अब तक उल्टी-दस्त के 3200 मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा बच्चे-बुजुर्ग और महिलाएं हैं। यह त्रासदी नगर निगम के अफसर और जनप्रतिनिधियों की रोज की लापरवाह कार्यशैली से हुई। भागीरथपुरा में जर्जर सप्लाई लाइन को नई में बदलने के लिए एमआइसी में प्रस्ताव पास होने से लेकर वर्क ऑर्डर देने में ही काफी देरी हुई। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और महापौर पुष्यमित्र भार्गव बुधवार देर रात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय पहुंचे। संघ से जुड़े सूत्रों ने बताया कि दोनों से भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों और प्रशासनिक तालमेल को लेकर बात की गई।
नगरीय विकास एसीएस संजय दुबे की बैठक में अफसरों पर काम न करने आरोप लगाने वाले महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने ही इस फाइल पर 67 दिन बाद हस्ताक्षर किए थे। दूसरे मामले में टेंडर की फाइल बनाने में 7 माह लगा दिए। वर्क ऑर्डर भी दिए तो लेटलतीफी ऐसी कि 10 माह में पूरा होने वाला काम 35 माह में पूरा नहीं हुआ। इधर, आरएसएस ने बुधवार शाम महापौर भार्गव व कलेक्टर शिवम वर्मा को तलब किया। संघ कर्यालय में डेढ़ घंटे मालवा प्रांत प्रचारक राजमोहन सिंह ने बैठक ली। बताते हैं, संघ पदाधिकारियों ने उचित व्यवस्थाएं बनाने पर जोर दिया। दोनों की क्लास भी लगाई।
सूत्रों ने यह भी बताया कि संघ के मालवा प्रांत प्रचारक राजमोहन ने कलेक्टर और महापौर से करीब डेढ़ घंटे तक वन-टू-वन चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक, मामला संभाल नहीं पाने पर महापौर को कड़ी फटकार भी लगी है। महापौर भार्गव, रामबाग स्थित नए संघ कार्यालय ‘सुदर्शन’ सरकारी गाड़ी से पहुंचे थे। उन्हें छोड़ने के बाद शासकीय वाहन वापस रवाना हो गया था। बैठक खत्म होने के बाद वे अपने निजी वाहन से लौटे।
बैठक से बाहर आने के बाद महापौर भार्गव ने कहा- मैं संघ कार्यालय आता रहता हूं। आज भी सहज ही आया था। इंदौर की छवि को ठीक करना प्राथमिकता सूत्रों ने बताया कि बैठक में यह बात भी हुई है कि भविष्य में इस तरह की घटना न हो और प्रशासनिक तालमेल की कमी की बात भी नहीं उठे। सभी अधिकारी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की बातों को सुनें और उनके साथ तालमेल बैठाते हुए काम करें। चर्चा का फोकस इस बात पर रहा कि अब इंदौर की छवि को स्वच्छ करना है। पहली प्राथमिकता है कि भागीरथपुरा में हालात ठीक हो जाएं। यहां हर जरूरतमंद तक पहुंचा जाए। बीमारों के इलाज में किसी तरह की कोताही न हो।

