मकड़ाई एक्सप्रेस 24 बैतूल। जिले की आमला तहसील से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नगर पालिका आमला के वर्तमान सीएमओ नितिन बिजवे पर पद का दुरुपयोग कर परिजनों को फर्जी ठेके दिलाने के आरोप में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने मामला दर्ज किया है।
प्रारम्भिक जांच में खुलासा हुआ कि बिजवे ने अपने माता-पिता और पत्नी के नाम पर फर्म बनाकर नगर परिषद से ठेके हासिल किए, जिससे लाखों रुपये का लाभ उठाया गया।
पद का दुरुपयोग कर परिजनों को दिलाया आर्थिक फायदा
जांच एजेंसी के अनुसार, नितिन बिजवे ने वर्ष 2016 से 2020 के बीच नगर परिषद न्यूटन चिखली में पदस्थ रहते हुए सरकारी पद का दुरुपयोग किया। उन्होंने परिजनों की फर्मों को टेंडर प्रक्रिया में शामिल कराया और सामग्री आपूर्ति के नाम पर भुगतान भी स्वीकृत कराया।
नियम विरुद्ध भुगतान की मंजूरी
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि कई बार बिजवे ने स्वयं ही भुगतान की मंजूरी दी, जो प्रत्यक्ष रूप से नियमों का उल्लंघन था। शिकायत की पुष्टि होने के बाद एजेंसी ने संबंधित दस्तावेज, भुगतान विवरण और निविदा प्रक्रिया की गहन जांच की और अब उनके खिलाफ आधिकारिक मामला दर्ज किया गया है।
पत्नी, पिता और मां की फर्मों को मिला लाखों का भुगतान
ईओडब्ल्यू रिपोर्ट के मुताबिक,
नितिन बिजवे की पत्नी दीपाली बिजवे की फर्म एमपी ग्रीन इंटरप्राइजेज को ₹2,81,997 का भुगतान हुआ।
पिता गुणवंतराव बिजवे की फर्म यश इंटरप्राइजेज को ₹2,92,149 का भुगतान मिला।
वहीं मां शोभा बिजवे की फर्म जीआर इंटरप्राइजेज को ₹61,015 का भुगतान किया गया।
ये सभी भुगतान 23 मार्च 2018 से 9 अक्टूबर 2018 के बीच किए गए, उस दौरान नितिन बिजवे सीएमओ पद पर पदस्थ थे। कुल भुगतान राशि ₹6,35,161 रही। ये तीनों फर्में जैम पोर्टल पर पंजीकृत थीं और ऑनलाइन निविदाओं में भाग लेती थीं। ईओडब्ल्यू ने इस पूरी प्रक्रिया को “पद के दुरुपयोग से प्राप्त अनुचित लाभ” करार दिया है।
लंबे समय से गैरहाजिर, पार्षदों ने हटाने की मांग की
वर्तमान में नितिन बिजवे आमला नगर पालिका के सीएमओ हैं, लेकिन वे पिछले कई दिनों से बिना सूचना के कार्यालय से अनुपस्थित हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने उनके स्थान पर विरेंद्र तिवारी को अस्थायी रूप से कार्यभार सौंप दिया है।
इसी बीच भाजपा के 10 पार्षदों ने विधायक योगेश पंडाग्रे को पत्र लिखकर नितिन बिजवे को पद से हटाने की मांग की। पार्षदों ने आरोप लगाया कि बिजवे नगर के विकास कार्यों में रुचि नहीं ले रहे और शासन के निर्देशों की लगातार अनदेखी कर रहे हैं।
ईओडब्ल्यू द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बाद पार्षदों की मांग को और बल मिला है। सूत्रों के मुताबिक, नगरीय प्रशासन विभाग जल्द ही विभागीय जांच शुरू कर सकता है।
यह मामला प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है, जिससे सरकारी पदों के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अब क्या- किस किस पर कसेगा शिकंजा
अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि ईओडब्ल्यू की आगे की जांच में और कौन-कौन इस भ्रष्टाचार के जाल में फंसता है।इसमे नपा सीएमओ साथ उनके अधीनस्थ सहयोगी कर्मचारी भी उलझ सकते है।परिजन से भी पूछताछ हो सकती है।

