हरदा : ‘‘सही मार्गदर्शन हो और खेती में जोखिम लेकर नए प्रयोग किए जाएं तो पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी में भी नई संभावनाएं तैयार की जा सकती हैं।’’ यह कहना है ग्राम नहालखेड़ा, विकासखण्ड हरदा के प्रगतिशील कृषक कृष्णकांत विश्नोई का।
कृषक विश्नोई बताते हैं कि उनका परिवार पहले पारंपरिक खेती करता था, जिसमें सोयाबीन, गेहूं, चना, मूंग जैसी फसलें उगाते थे। उपज को बेचने पर लाभ कम होता था। फिर उन्होंने उद्यान विभाग हरदा से संपर्क किया। विभाग के अधिकारियों ने उन्हें उक्त फसलों का रकबा कम कर उनके साथ-साथ उद्यानिकी फसल के अंतर्गत आम का बगीचा लगाने की सलाह दी। तकनीकी जानकारी और मार्गदर्शन से उनका रुझान बागवानी की तरफ हुआ।
किसान ने हिम्मत दिखाते हुए अपने 1 हेक्टेयर खेत में थाईलैंड की प्रसिद्ध किस्म ‘‘बनाना मैंगो’’ के एक हजार पौधे लगाए। यह आम देखने में बेहद आकर्षक, लंबा और कुछ हद तक दशहरी आम जैसा होता है, जो बाजार में ऊंचे दाम पर बिकता है। बगीचा लगाने के पहले ही वर्ष में उन्हें 500 से 600 आमों का फलन प्राप्त हुआ, जिनमें प्रत्येक फल का वजन 300 से 350 ग्राम रहा।
कम फलन के बावजूद कृषक का हौसला नहीं टूटा। कृषक का कहना है कि प्रथम फलन में कम फलों का मिलना इस बात का अनुभव था कि सही तरीके से पौधों की देखभाल और धैर्य रखा जाए तो अच्छी सफलता मिलती है। उन्होंने माना कि यह सही देखभाल और धैर्य का परिणाम है कि नए प्रयोग सफल हो रहे हैं।
विश्नोई बताते हैं कि यदि सही मार्गदर्शन हो और खेती में जोखिम लेकर नए प्रयोग किए जाएं, तो पारंपरिक खेती के साथ बागवानी में भी अपार संभावनाएं हैं। अपनी इस सफलता का श्रेय उन्होंने उद्यान विभाग हरदा और विभागीय अधिकारियों को दिया है, जिन्होंने समय-समय पर तकनीकी सहयोग प्रदान किया।

