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ऑपरेशन सिंदूर में सैन्य के साथ-साथ नागरिक विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण: रक्षा मंत्री

नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा 7 मई 2025 को पाकिस्तान के खिलाफ किए गए ऑपरेशन सिंदूर की सैन्य कार्रवाई को कुछ दिन बाद तीन महीने पूरे हो जाएंगे। इसके बीच सरकार ने कई मौकों पर देश की सशस्त्र सेनाओं के पराक्रम को सराहा है। लेकिन शुक्रवार को इससे इतर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत के इस सैन्य अभियान में सैन्य के अलावा पर्दे के पीछे से (बैक-एंड सपोर्ट) नागरिक विभागों (सिविल) द्वारा निभाई गई भूमिका को भी प्रमुखता से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में सैन्य के साथ ही देश के नागरिक विभागों का भी पूरा सहयोग रहा है। यह एक प्रकार से इस सैन्य अभियान की सफलता की कुंजी था। वर्तमान की सुरक्षा चुनौतियों के बीच असली ताकत नागरिक और सैन्य तालमेल ही है। यह जानकारी रक्षा मंत्री ने 1 अगस्त को राजधानी स्थित डीआरडीओ भवन में आयोजित किए गए 84वें सशस्त्र सेना मुख्यालय नागरिक सेवा (एएफएचक्यू) दिवस-2025 समारोह को संबोधित करते हुए दी।

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बताते चलें कि पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान की शह पर भारत के खिलाफ आतंकी हमले करने वाले लश्कर के छद्म संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट यानी टीआरएफ के आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। जिसमें भारत के 25 और एक नेपाल का नागरिक शामिल था। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई से पाकिस्तान को इस हमले को लेकर करारा जवाब दे दिया है। साथ ही ये उसे ये भी बता दिया है कि देश का यह अभियान अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। इस पर फिलहाल अस्थायी विराम लगाया गया है। नई सोच के साथ आतंकवाद के विरूद्ध भारत की शून्य सहिष्णुता की नीति जस की तस बरकरार है।

नवाचार बढ़ाने पर दिया जोर
राजनाथ ने कहा कि आज के दौर में बदलती हुई सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से मजबूती और नवीनता की भावना के साथ हमें नवाचारों को बढ़ाने पर जोर देते हुए आगे बढ़ना चाहिए। जटिल सुरक्षा परिदृश्य के बीच पूरा देश युद्ध लड़ता है। लेकिन इसमें केवल सैन्य बल ही शामिल नहीं होते हैं। ऐसे में हमें किसी भी तरह की लापरवाही या गलती की कोई गुंजाइश नहीं छोड़नी चाहिए। उन्होंने नागरिक सेवाओं को मजबूत सैन्य तंत्र की आधारशिला बताते हुए कहा, रक्षा मंत्रालय के लिए वायुसेना मुख्यालय सेवाएं एक संस्थागत स्मृति के रूप में कार्य करती हैं। यह प्रशासन में स्थिरता, क्षेत्र विशेषज्ञता और एकरूपता प्रदान करती है। साथ ही नीतिगत निरंतरता और नागरिक-सैन्य तालमेल स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जो एक आधुनिक और एकीकृत राष्ट्रीय रक्षा प्रणाली का एक मजबूत स्तंभ है।