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जो लोग स्वस्थ, नीरोग और प्रसन्न जीवन जीना चाहते हैं, उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि स्वास्थ्य का वास्तविक केंद्र शरीर नहीं, मन है। जब मन पवित्र, शांत और प्रसन्न रहता है, तब सामान्य साधनों में भी असाधारण शक्ति उत्पन्न हो जाती है।
🍃 कहा गया है—मन की अवस्था ठीक हो, तो साधारण भोजन भी अमृत बन जाता है। जो अन्न हमें उपलब्ध हो, उसे श्रद्धा और प्रसन्नता के साथ ग्रहण करें। प्रत्येक ग्रास लेते समय यह भावना रखें कि यह भोजन हमें बल, स्वास्थ्य और जीवन-ऊर्जा प्रदान कर रहा है। भोजन से पहले और बाद में ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना, उसे और अधिक लाभकारी बना देता है।
🌼 दैनिक जीवन में मन को निराशा, क्रोध और भय से दूर रखें। अपने कार्यों को पवित्र और ईमानदार बनाएं, ताकि भीतर की शांति बनी रहे। जब मन निर्भय और निर्द्वंद रहता है, तब रोग और शोक स्वयं दूर रहने लगते हैं।
🌟 जिस प्रकार अतिथि वहीं जाता है जहाँ उसका स्वागत हो, उसी प्रकार रोग भी वहीं टिकते हैं जहाँ उन्हें मन से स्वीकार किया जाता है। जो व्यक्ति रोग का भय नहीं पालता और नकारात्मक विचारों को स्थान नहीं देता, उसके जीवन में रोग अधिक समय तक नहीं ठहरते।
🌿 इसलिए अपने मन के द्वार सदैव सुविचारों के लिए खोलें। क्योंकि सुविचार ही स्वास्थ्य हैं और प्रसन्नता ही वास्तविक शक्ति। जो व्यक्ति मन को पवित्र और आनंदित रखता है, वही सच्चे अर्थों में स्वस्थ जीवन जीता है।
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