TIMARNI NEWS : 2 लाख से ज्यादा गुमठी बकाया किराए पर सीएमओ की साठगांठ, नगर पंचायत के सीएमओ के भ्रष्टाचार की खुली पोल
मकड़ाई समाचार टिमरनी। टिमरनी नगर पंचायत परिषद के भ्रष्ट सीएमओ राहुल शर्मा के भ्रष्टाचार का कारनामा थमने का नाम ही नहीं ले रहा है ऐसा ही मामला एक और सामने आया है जहां स्टेशन बस्ती मार्ग पर रखी गुमठी किराए मामले में लगभग 2 लाख 40 हजार की वसूली ना करते हुए नगर पंचायत के सीएमओ राहुल शर्मा द्वारा गुमठी मालिक से सांठगांठ करते हुए किराया वसूली का मामला रफा-दफा करते नजर आ रहे हैं। तो वही नगर की सड़कों पर अतिक्रमण कराने की बात हो या नगर में कहीं निर्माण कार्य कराने का मामला हो। या खरीदी कार्यों में फर्जी बिल लगाने का मामला हो, या फिर नगर परिषद की गुमठी किराया वसूली का मामला हो। ऐसे अन्य मामलों में राहुल शर्मा द्वारा भारी भ्रष्टाचार किया जा रहा है जिसकी सही एवं उचित जांच होने पर सारा मामला सामने आ जाएगा।
यह है मामला
नगर के न्यू मार्केट में रखी गुमठी मालिक अनिल पिता चंदूलाल कनौजिया का वर्ष 2011 से गुमठी किराया लगभग 2 लाख 40 हजार बकाया था। जिसका नोटिस नगर पंचायत के सीएमओ द्वारा 1 माह पूर्व देकर 7 दिन में वसूली करने के आदेश दिए गए थे। लेकिन नगर पंचायत के भ्रष्ट सीएमओ द्वारा एक माह बीत जाने के बावजूद भी उक्त गुमठी मालिक से ना तो किराया वसूल किया गया। जिससे नगर पंचायत निधि को भी भारी नुकसान हो रहा है और ना ही कोई उचित कार्रवाई की गई। तो फिर सात दिवस में कार्रवाई करने का नोटिस क्यों थमाया गया। सूत्रों से मिली जानकारी में पता चला कि सीएमओ द्वारा भारी राशि लेकर गुमठी किराया में मालिक से सांठगांठ कर मामले को रफा-दफा किया जा रहा है।
एसडीएम के नाम से सीएमओ ने क्यों लिए पैसे
नगर पंचायत परिषद के भ्रष्ट सीएमओ ने आखिर अपने वरिष्ठ अधिकारी एसडीएम के नाम का सहारा लेकर फरियादी गोलू रात्रे से क्यों 85 हजार लिए और क्या 50 हजार की मांग एसडीएम ने सीएमओ से की थी ? जो सीएमओ ने फरियादी गोलू रात्रे से कहा था कि 50 हजार एसडीएम को देना पड़ेगा तब तुम अपनी गुमठी शासकीय जगह पर रख सकते हो। अपने वरिष्ठ अधिकारी के नाम का सहारा लेकर नगर के नागरिक को गुमराह करने पर एसडीएम और कलेक्टर द्वारा अभी तक भ्रष्ट सीएमओ पर कोई कार्यवाही नहीं की गई और ना ही नगर कि उक्त सड़क से अतिक्रमण हटाया गया। जिससे यह प्रतीत होता है कि कहीं ना कहीं उच्च अधिकारियों की भी मिलीभगत है। जिससे उक्त मामले में कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।

