जानिए जून 2026 में शनि किन राशियों को परेशान कर रहे हैं……?
मकडा़ई एक्सप्रेस 24 ज्योतिष । भारतीय ज्योतिष में शनि ग्रह को बहुत प्रभावकारी माना गया है इनका प्रभाव राशियों पर ज्यादा समय तक रहता है और इनके प्रभाव में आने वाली राशियों पर असर देखने को मिलता है शनि न्याय और कर्म के देवता है।इस वर्ष 2026 में शनि पूरे साल मीन राशि में रहेंगे। राशि नहीं बदलेंगे, इसलिए असर जून 2027 तक चलेगा।
शनि की साढ़ेसाती वाली 3 राशियां
– कुंभ राशि : अंतिम चरण चल रहा है। जून 2027 तक रहेगा।
असर.: मानसिक तनाव, छोटे काम में भी देरी, पारिवारिक तनाव। पेट, पैर, हृदय रोग की समस्या।
– मीन राशि : दूसरा चरण – सबसे भारी। जून 2027 तक।
असर : सेहत पर असर, आर्थिक परेशानी, करियर में कठिन निर्णय।
– मेष राशि : पहला चरण शुरू।
असर : नई जिम्मेदारियां, नौकरी में बदलाव, घर-परिवार में कलह, सेहत में उतार-चढ़ाव।
शनि की ढैय्या वाली 2 राशियां
– सिंह राशि : अष्टम ढैय्या/कंटक ढैय्या।
असर : अनचाहे खर्च, यात्रा में कष्ट, वाणी की तीव्रता से नुकसान, संतान की चिंता।
– धनु राशि : चतुर्थ ढैय्या।
असर : खर्च बढ़ेगा, पैसों के फैसले में उलझन, सीने/हृदय की तकलीफ, संपत्ति विवाद।
कब तक रहेगा असर..?
जून 2027 तक । शनि 29 मार्च 2025 को मीन में आए थे और जून 2027 तक यहीं रहेंगे।
– 27 जुलाई 2026 को शनि वक्री होंगे
– 11 दिसंबर 2026 को मार्गी होंगे, लेकिन राशि नहीं बदलेंगे।
शनि के दुष्प्रभाव कम करने के 10 असरदार उपाय
राशि अनुसार खास उपाय
– कुंभ.: हनुमान चालीसा रोज, शनि अमावस्या को तेल दान, शनिवार को काले तिल दान।
– मीन : शनिवार को पीपल पूजा, शनि स्त्रोत पाठ, गरीबों को काले वस्त्र-अनाज दान।
– मेष : हनुमानजी की उपासना, सरसों तेल का दीपक, काले कुत्ते/गाय को रोटी।
– सिंह : “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का जाप, उड़द दान।
– धनु : काले घोड़े की नाल धारण, नीला कपड़ा दान, हनुमान मंदिर दर्शन।
सभी के लिए सामान्य उपाय
1. शनिवार का नियम : शनिदेव को सरसों तेल चढ़ाएं, काली उड़द, तिल, लोहा, काले वस्त्र दान करें।
2. हनुमान उपासना : रोज हनुमान चालीसा/सुंदरकांड पढ़ें। शनि हनुमानजी से डरते हैं।
3. पीपल पूजा : शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों तेल का दीपक जलाएं।
4. कर्म सुधारें : गरीब, मजदूर, असहाय की सेवा करें। शनि न्याय के देवता हैं।
5. अनुशासन : जल्दबाजी न करें, गलत फैसला न लें। धैर्य रखें।
6. शनि चालीसा : रोज पाठ करने से मानसिक बल मिलता है।
7. नीलम रत्न : जन्मपत्री दिखाकर ही पहनें। शंका हो तो नीली या जमुनिया धारण करें।
सबसे जरूरी बात
शनि कर्म और न्याय के ग्रह हैं। ये मेहनत और ईमानदारी वालों को परेशान नहीं करते, बल्कि तरक्की देते हैं। साढ़ेसाती-ढैय्या का समय आत्मविकास और स्थिरता भी देता है।
चेतावनी : अगर शनि की महादशा/अंतर्दशा भी चल रही हो तो असर ज्यादा होगा। कुंडली किसी अच्छे ज्योतिषी को दिखाएं।

