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वर्ष 2014 में 15 लाख की लागत से बना सुलभ शौचालय क्यों तोडना चाहती है नगर परिषद , कांग्रेस बोली ये सरकार की राशि का दुरुपयोग है। 

टिमरनी / नगर परिषद द्वारा वर्ष 2014 में सुलभ इंटरनेशनल से सचालन एवं संधारण के अनुबद के आधार पर मडी पुलिया के पास सुलभ शौचालय बनाया गया था जिसके सचालन एवं रख रखाब की जिम्मेदारी सुलभ इटरनेशनल सस्था की है जो की पूरे प्रदेश में सुलभ जन सुविधा केन्द्र सचालित कर रहीं है।

परंतु  नगर परिषद टिमरनी के 25 जुलाई को होने वाले साधारण सम्मेलन के एजेंडे में विषय क्रमाक 10 में उक्त शौचालय को पुराना बताकर डिस्मेटल कर नया शौचालय बनाने का प्रास्ताव लिया जा रहा है। जो की अनुचित एव नगर परिषद की राशि का दुरुप्रयोग है।

 

टिमरनी नगर परिषद पर नियम विरूध कार्य करने का आरोप लगाते हुए, नगर काग्रेस अध्यक्ष एव पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने बताया की उनकी परिषद के कार्यकाल मे वर्ष 2014 में उक्त सुलभ शौचालय का निर्माण कार्य किया गया था जिसे सचालन एवं संधारण के लिए सुलभ इटरनेशनल को 30 वर्ष के लिए अनुबधित किया गया था।

 

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सुलभ सस्था द्वारा निर्धारित शुल्क के आधार पर उसे सचालित करती आ रही है। अगर शौचालय में कोई भी टूट फूट या क्षति हुई है तो उसकी मरम्मत या सुधार कार्य करने की जिम्मेदार सुलभ इंटरनेशनल संस्था की है। ऐसे में नगर परिषद द्वारा उक्त शौचालय को तोडने का विचार करना अनुचित निर्णय है। जो शौचालय 30 वर्ष के अनुबंधित है उसे 11 साल में ही तोडना यानी सिर्फ भ्रष्टाचार करना है।

 

शासकीय आस्पताल के पास वर्ष 2018 में शौचालय एव मुत्रालय का निर्माण कार्य किया गया था ओर जिसे 7 वर्ष भी पूर्ण नहीं हुए ओर नगर परिषद द्वारा इसे भी तोडने का प्रस्ताव लिया गया है जो की अनुचित है श्री जायसवाल ने आरोप लगाया की वर्तमान परिषद ने मुख्य बाजार में भैरव बाबा मंदिर के पीछे बने मुत्रालय को भी तोड दिया गया है।

 

एवं वहां पर जो नवीन शौचालय एवं मुत्रालय बना है वह भी अधूरा पडा है तथा उसमें ताला लगा हुआ है जिससे बाजार में आने वाले नागरिक एवं दुकानदार परेशान है पूरे बाजार क्षेत्र में कोई भी शौचालय या मूत्रालय नहीं है। जायसवाल ने नगर परिषद अध्यक्ष एवं पार्षदों को सलाह दी है की वे पहले बाजार क्षेत्र में अधूरे बने शौचालय को पूर्ण कर शुरू करें एवं जो 2014 एवं 2018 में बने शौचालयों को न तोडते हुए संबंधित से मरम्मत कराई जाये। यू ही जनतां का पैसा वर्बाद न  किया जायें।