जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर ने छात्रों के हित में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि फीस बकाया होने पर किसी भी स्कूल-कॉलेज द्वारा छात्र के मूल दस्तावेज, टीसी या मार्कशीट को रोकना पूरी तरह अवैध है।
क्या था पूरा मामला…?
बीकानेर की 20 वर्षीय छात्रा नंदिनी स्वामी ने श्रीगंगानगर के सुरेंद्र डेंटल कॉलेज में BDS में एडमिशन लिया था और 2,75,000 रुपये फीस जमा की थी। बाद में उन्हें हरियाणा के झज्जर के दूसरे कॉलेज में मौका मिला तो उन्होंने पहले कॉलेज से अपने दस्तावेज वापस मांगे। कॉलेज ने कहा कि पूरे 4 साल की फीस जमा करो, तभी दस्तावेज मिलेंगे।
छात्रा ने हाईकोर्ट में याचिका (26319/2026) दायर की। 23 अक्टूबर को जस्टिस फरजंद अली ने सुनवाई की।
हाईकोर्ट की 4 बड़ी टिप्पणियां
1. मूल दस्तावेजों को बंधक बनाना गलत है।
2. दस्तावेज फीस वसूली की सिक्योरिटी नहीं हैं।
3. फीस का विवाद अलग है, दस्तावेज रोकना अलग है।
4. फीस के कारण छात्र का भविष्य खराब नहीं किया जा सकता।
कोर्ट का आदेश – कोर्ट ने कॉलेज को आदेश दिया कि 24 अक्टूबर सुबह 11 बजे तक छात्रा के सभी मूल दस्तावेज लौटाए जाएं। कॉलेज फोटोकॉपी अपने पास रख सकता है। सीट को फिलहाल खाली माना जाए। फीस वापसी पर अंतिम फैसला 26 नवंबर को अगली सुनवाई में होगा।
यह फैसला उन हजारों छात्रों के लिए राहत है जिनके दस्तावेज फीस के नाम पर रोके जाते हैं।

