हरदा, : प्रत्येक वर्ष 28 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षित गर्भपात दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य सुरक्षित गर्भ समापन सेवाओं के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना, असुरक्षित गर्भ समापन से होने वाली मातृ मृत्यु एवं जटिलताओं की रोकथाम करना तथा महिलाओं एवं किशोरियों को उनके प्रजनन स्वास्थ्य से संबंधित अधिकारों एवं उपलब्ध सेवाओं के बारे में जानकारी प्रदान करना है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के सभा कक्ष में सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षित गर्भपात दिवस पर जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एच.पी. सिंह ने बताया कि कार्यशाला में जिला आजीविका मिशन, महिला एवं बाल विकास विभाग,
पुलिस विभाग, पंचायत राज विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से संशोधित गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम 1971 तथा पीसीपीएनडीटी एक्ट (पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994) के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शैलजा महाजन ने कहा कि जानकारी का अभाव, सामाजिक कलंक, सेवाओं तक पहुँच में कठिनाई, प्रशिक्षित सेवा प्रदाताओं की कमी तथा असुरक्षित तरीकों का उपयोग महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
उचित परामर्श महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य संस्थाओं तक पहुँचाने में सहायता करता है। कार्यशाला में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कमलेश गौड़, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एम.के. चौरे, जिला चिकित्सालय से नव नियुक्त महिला चिकित्सा अधिकारी एवं स्टाफ, डीपीएचएनओ, महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यकर्ता एवं अन्य स्टाफ उपस्थित थे।

