प्रस्तुत है आज की मेरी दूसरी कविता-
खुद का निवाला दिया सारा सुख चैन दिया,,
और दे दी साथ में यह सारी ही कमाई है
बेटों के भविष्य हेतु खफा डाली सारी उम्र,,
वही बेटे आज देखो बने हरजाई हैं
फूल जैसी बेटियों ने दिल से ना रखा दूर,,
जग जानता है यारों यही सच्चाई है
माई बाप के लिए जो रोती रही उम्र भर,,
कौन कहता है यहा बेटियां पराई है
मुकेश शाण्डिल्य चिराग
9926419837

