इटारसी/हरदा। फसल कटाई के बाद खेतों की सफाई के लिए घास-फूस, खरपतवार और नरवाई (पराली) जलाने की पुरानी आदत किसानों के लिए भारी पड़ रही है। इससे न सिर्फ वायु और मृदा प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि पड़ोस के खेतों में खड़ी फसल में आग लगने से बड़ा आर्थिक नुकसान भी हो रहा है।
बुधवाड़ा में कलेक्टर ने दी समझाइश, अंधियारी और डोंगरवाड़ा में फिर लगी आग
इटारसी तहसील में भी यही स्थिति बनी हुई है। शुक्रवार को कलेक्टर ने बुधवाड़ा में खेत पर पहुंचकर किसानों को नरवाई न जलाने की समझाइश दी थी। उन्होंने तकनीक और मशीनों से नरवाई प्रबंधन के तरीके भी बताए।
इसके बावजूद अंधियारी और डोंगरवाड़ा के बीच खेतों में किसान नरवाई में आग लगाते हुए देखे गए। फोटो में धुआं उठता हुआ साफ दिखाई दे रहा है।
प्रशासन सख्त – ड्रोन और सैटेलाइट से निगरानी, 3 किसानों पर FIR
जिला प्रशासन अब ड्रोन और सैटेलाइट से नरवाई जलाने की घटनाओं की मॉनिटरिंग कर रहा है। नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना और FIR दर्ज की जा रही है।
जिले में अब तक 3 किसानों पर FIR दर्ज हो चुकी है। इनमें पिपरिया और सिवनी मालवा में पहले ही दो मामले दर्ज थे। तीसरा मामला शुक्रवार को इटारसी के ग्राम चाटली में सामने आया, जहां नरवाई जलाने पर किसान विनय चौधरी पिता गुलाबदास चौधरी पर एसडीएम इटारसी नीलेश शर्मा ने FIR दर्ज करवाई।
हरदा में किसान 8 एकड़ मक्का राख
विगत दो दिन पूर्व हरदा जिले में एक ऐसा ही मामला सामने आया। बताया जा रहा है कि एक किसान ने अपने खेत का कचरा जलाया, जिसकी चिंगारी उड़कर पास के खेत में चली गई। वहां खड़ी मक्का की फसल जलकर पूरी तरह खाक हो गई। पीड़ित किसान अब मुआवजे के लिए प्रशासन के चक्कर काट रहा है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नरवाई जलाने से खेत की उर्वरा शक्ति खत्म हो जाती है। जमीन में मौजूद लाभदायक जीवाणु मर जाते हैं और अगली फसल की पैदावार 10 से 15 प्रतिशत तक कम हो जाती है।
पंजाब सरकार की तरह अब मध्यप्रदेश में भी प्रशासन सख्ती दिखा रहा है, जिसके कारण इस वर्ष पराली जलाने के मामलों में कमी आई है, लेकिन पूरी तरह रोक अभी भी नहीं लग पाई है।
> प्रशासन की किसानों से अपील – खेत के कचरे को जलाने की बजाय रोटावेटर, हैप्पी सीडर और कम्पोस्ट बनाकर उसका उपयोग करें। इससे खेत की सेहत भी बचेगी और पड़ोसी की फसल भी सुरक्षित रहेगी।

