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जानिए, कब है श्राद्ध अमावस्या

सर्व पितृ श्राद्ध अमावस्या 8 अक्टूबर सोमवार को दोपहर 11.34 मिनट पर शुरू होगी जो 9 अक्टूबर मंगलवार को सुबह 9.18 तक रहेगी। मान्यता के अनुसार अमावस्या पर सभी पितर धरती पर आते हैं। सर्व पितृ श्राद्ध अमावस्या 8 अक्टूबर सोमवार को दोपहर 11.34 मिनट पर शुरू होगी जो 9 अक्टूबर मंगलवार को सुबह 9.18 तक रहेगी जिन जातकों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो अथवा किसी का श्राद्ध भूल गए हों तो भूले-चूकों का श्राद्ध करके पितरों को प्रसन्न कर वरदान प्राप्त कर सकते हैं।
प्रसिद्ध तीर्थ स्थान च्यवन ऋषि की तपस्यास्थली ढोसी नजदीक नारनौल (हरियाणा), गयाजी (बिहार), संगम (इलाहाबाद), हरिद्वार में पितरों के नाम से गंगा-स्नान करके धूप, दीपक जलाएं तथा 16 पितरों की पत्तल पर खीर-पूरी, इमरती, दही-बड़े, बर्फी, काले तिल रख कर, हाथ में चावल, पुष्प, जल व दक्षिणा लेकर संकल्प करें और गणेश, पूजन, विष्णु, पीपल का पूजन करें। पीपल को जल चढ़ाएं, पंचामृत चढ़ाकर गंगाजल से स्नान कराएं, मौली लपेटें, जनेऊ अर्पण करके, लघु श्रीफल अर्पण करके तिलक कर पुष्प चढ़ाएं, धूप-दीप, नैवेद्य, खीर, इमरती का भोग लगाएं। फल चढ़ाकर दक्षिणा अर्पण कर नमस्कार करें। इसके बाद खड़े होकर पीपल पर सूत लपेटते हुए सर्व पितर दोष निवारण मंत्र का जाप करते हुए परिक्रमा करें और अपने पितरों को हृदय से नमस्कार करें। ब्राह्मण को भोजन कराकर दक्षिणा व गौदान देकर प्रसन्न कर अपने पितरों का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करें तथा अपने पितरों को विदा करें।
दान वस्तु
चावल, एक-एक पाव जौ, चीनी, उड़द, मूंग, मसूर, चने की दाल, बाजरा, दही, खीर, मिठाई तथा सफेद वस्त्र, फल, पुस्तक, घी, चांदी-सोना आदि वस्तुओं का संकल्प करके पीपल वृक्ष के नीचे ही किसी जरूरतमंद (अंध-विद्यालय, कुष्ठाश्रम, वृद्धाश्रम, अनाथाश्रम, गौशाला)या विद्वान ब्राह्मण को श्रद्धापूर्वक दान कर देना चाहिए। पत्नी के कारण गृह- क्लेश हो तो गौरी-शंकर रुद्राक्ष धारण करें।