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रिश्तों की जो गरिमा हिंदी में है वह अन्य किसी भाषा में नहीं है। कौशलेंद्र कृष्ण शास्त्री जी

मनकामेश्वर एवं हनुमान शनि मंदिर सुरेंद्रनगर में चल रही संगीतमय श्रीमद् भगवत महापुराण की के कथावाचक कौशलेंद्र कृष्ण शास्त्री जी  ने कहा कि धनवान व्यक्ति वही है जो अपने तन, मन, धन से सेवा भक्ति करे, वही आज के समय में धनवान है। लोगों को आत्मनिर्भर बनना चाहिए, तुम नौकरी देने वाला बनो ना की नौकर। साथ ही महाराज जी ने कहा कि आज कल की युवा पीढ़ी अपने धर्म, अपने भगवान को नहीं मानते है। लेकिन तुम अपने धर्म को जानना चाहते हो तो पहले गीता, भागवत, रामायण पढ़ो, ऐसा करने से तुम ही नहीं तुम्हारी आने वाली पीढ़ी भी संस्कारी हो जायेगी। उन्होंने कहा कि गलती माता-पिता की है जो अपने बच्चों को संस्कार नहीं दे पाते। वे बोले के तुम जानवरों की तरह बस बच्चे पैदा किए जा रहे हो जो कि कोई बड़ी बात नहीं है क्योंकि बच्चे तो जानवर भी पैदा कर लेते हैं। बड़ी बात होती है उन्हे संस्कार देना। बच्ची पढ़ने लिखने के साथ संस्कारी भी बननी चाहिए ताकि समाज में चल रही कुरीतियों का अंत किया जा सके और मासूम बच्चियों के 35 टुकड़े होने से उन्हें बचाया जा सके। भागवत के दौरान ” क्या रखा है ऐसी रिश्तेदारी में.. हमें रख ले श्याम तेरी दरबारी में ” , इत्यादि भजनों पर श्रद्धालुओं ने मंत्रमुग्ध हो प्रभु भक्ति का आनंद प्राप्त किया। ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल ने कहा की रिश्तों को जितना महत्व हमारी हिंदू संस्कृति में मिलता है उतना दुनिया की किसी अन्य संस्कृति में नहीं है। इसीलिए हमारे यहां रिश्तो का सम्मान होता है। रिश्तों की जो गरिमा हिंदी में है वह अन्य किसी भाषा में नहीं है।

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इस अवसर पर आयोजक महंत राम उदय दास ने बताया की कथा स्थल पर 22 जनवरी तक प्रतिदिन दोपहर 3:30 बजे से सांय 7:30 बजे तक श्रीमदभागवत कथा का दिव्य आयोजन होगा। सूरज शुक्ला, पंकज दूबे, नगर निगम के कर्मचारी राजेश आदि लोग उपस्थित रहे ‌‌।