मकड़ाई समाचार इंदौर। व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी पर तुरंत रोक लगाने की मांग करते हुए हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर हुई है। इसमें कहा है कि पॉलिसी लागू हुई तो नागरिकों की निजता का हनन होगा। याचिका में फेसबुक, इंस्टाग्राम, टि्वटर को भी पक्षकार बनाया गया है। इसमें कहा गया है कि सोशल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने वाली ये एप ऑनलाइन जुआं, आर्थिक धोखाधड़ी व अश्लीलता फैला रही है, लेकिन इन्हें रोकने के लिए कोई कानून नहीं है।
हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका मातृ फाउंडेशन नामक संस्था ने एडवोकेट अमेय बजाज के माध्यम से दायर की है। याचिका में कहा है कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप्प और टि्वटर सहित कई इंटरनेट मीडिया कंपनियों द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। ये कंपनियां ऑनलाइन जुआं, आर्थिक धोखाधड़ी, निजता का हनन, सांप्रदायिक हिंसा फैलाने का काम, अश्लीलता फैलाने, ऑनलाइन वैश्यावृत्ति को बढ़ावा देने, कॉपीराइट व ट्रेडमार्क का उल्लंघन, शासन, सुरक्षा बल, न्याय पालिका व देश की धरोहरों का माक बनाना और देवी-देवताओं को लेकर आपत्तिजनक सामग्री परोस रही हैं।
सरकार के पास इन्हें रोकने का कोई इंतजाम ही नहीं हैं। ऐसे में न चाहते हुए भी जनता इसका शिकार बन रही है। मातृ फाउंडेशन संस्था द्वारा केंद्र सरकार को इन मुद्दों पर सूचना के अधिकार के तहत आवेदन देकर जानकारी चाही गई थी लेकिन केंद्र सरकार का कहना है कि यह उसके क्षेत्राधिकार में नहीं है। संस्था ने व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।
ये मांग है याचिका में
– उपरोक्त विषय पर कोर्ट द्वारा गाइडलाइन जारी की जाए या कुछ कानूनी प्रविधान बनाए जाए, केंद्र सरकार को आदेश दिया जाए कि वह तुरंत कानून बनाए, एड-हॉक कमेटी बनाई जाए, सभी कंपनियों को आदेश दिया जाए कि वे आपत्तिजनक कंटेट तुरंत हटाएं, आइटी एक्ट की धारा 69 और 69ए में निष्पादित शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए शासन जियोलॉजिकल ब्लॉकिंग करे, व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए।

