सुनील पटल्या बेड़िया। ग्राम रावेर खेडी मध्य प्रदेश पर्यटन क्षेत्र बाजीराव पेशवा समाधि स्थल खनन माफियाओं का प्रमुख अड्डा बन गया है। ये आरोप ग्राम के सामाजिक कार्यकर्ता अनिल बिरला ने लगाया। बिरला ने बताया कि बताया कि पिछले तीन वर्षों से बाजीराव पेशवा समाधि स्थल परीक्षेत्र में सार्थी कंट्रक्शन कंपनी मिट्टी उत्खनन का कार्य कर रहे हैं। पिछले 2 वर्षो तक ग्राम रावेर मे उत्खनन किया वही वर्तमान में बाजीराव समाधि के पूर्व मे विरान ग्राम पांछला मे महेश्वर परियोजना के डूब प्रभावित खसरों का समतलीकरण व उत्खनन किया जा रहा है। यहाँ नर्मदा के किनारे ज्यादातर शासकीय खसरे है जो एनएसडीसी महेश्वर बांध परियोजना के डूब प्रभावित खसरे हे। जों भविष्य मे नर्मदा के पानी को रोकने का काम करेंगे। मिट्टी माफिया द्वारा पिछले तीन वर्षों से इन शासकीय खसरो पर मिट्टी का उत्खनन के साथ समतलीकरण कर रहे हैं। इसको लेकर अनिल बिरला ने तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर के साथ एनजीटी को लिखित में शिकायत की है। अगर शासन प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो निमाड़ मे डूब का क्षेत्रफल बहुत ज्यादा बढ़ेगा। पिछले वर्ष महेश्वर परियोजना की शिकायत पर जिला कलेक्टर द्वारा 12 करोड़ 48 लाख से इन्हे दंडित भी किया गया था। उसके बावजूद लगातार वीरान ग्राम पांछला में उत्खनन जारी है। डूब प्रभावित खसरों के समतलीकरण से आगे डूबने की संभावना बढ़ती जा रही है वही खनन माफियाओं द्वारा किसानों की सिंचाई पाइप लाइन को भी क्षतिग्रस्त किया जा रहा है। जिससे किसान काफ़ी परेशान हों रहें है। अगर स्थाई प्रशासन इस प्रकार माफियाओ की मदद करेगा तो किसानों द्वारा नर्मदा बचाओ सत्याग्रह आंदोलन किया जाएगा। अनिल बिरला ने बताया कि नर्मदा के उत्खनन के संदर्भ मे उन्होंने समाजसेवी मेघा पाटकर को भी फोन पर जानकारी दी है।
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