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1 अप्रैल से 1000 दवाएं हो जाएंगी महंगी, छोटी-बड़ी बीमारियों पर पड़ेगा इसका असर

नई दिल्ली। 1 अप्रैल से दर्द की दवाएं, एंटीबायोटिक दवाएं और बुखार कम करने वाली कई जरूरी दवाओं के दाम बढ़ जाएंगे। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल एक हजार से ज्यादा दवाओं के दामों में मामूली बढ़ोतरी की इजाजत दे दी है। यह बढ़ोतरी डब्ल्यूपीआई के आधार पर हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक एनपीपीए ने बताया कि वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार कार्यालय से मिले आंकड़ों के मुताबिक 2025 में डब्ल्यूपीआई में पिछले साल की तुलना में 0.64956 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक इसी आधार पर इन दवाओं की कीमतों में करीब 0.6 फीसदी की बढ़ोतरी की जा रही है। यह बढ़ोतरी हर साल नियमित रूप से की जाती है ताकि दवा कंपनियां बढ़ती लागत को कुछ हद तक संभाल सकें। समायोजित कीमतें एनएलईएम की 1000 से ज्यादा दवाओं पर लागू होंगी। इस बढ़ोतरी से कई आम दवाएं प्रभावित होंगी। इनमें दर्द निवारक दवाएं जैसे पैरासिटामॉल शामिल हैं। बुखार और सिरदर्द में इस्तेमाल होने वाली यह दवा सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाती है। इसके अलावा एंटीबायोटिक दवाएं जैसे एजिथ्रोमाइसिन और सिप्रोफ्लॉक्सासिन भी महंगी होंगी। एनीमिया की दवाएं, विटामिन और मिनरल्स की दवाएं, कोविड-19 मरीजों के लिए कुछ दवाएं और स्टेरॉयड्स भी महंगी हो जाएंगी।

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दवा कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। ईरान-इजराइल युद्ध के कारण एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स और सॉल्वेंट्स की कीमतें 30-35 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। ग्लिसरीन की कीमत में तो 64 फीसदी का उछाल आया है। पैकेजिंग मटेरियल जैसे पॉलीविनाइल क्लोराइड और एल्युमिनियम फॉइल भी 40 फीसदी महंगे हो गए हैं। एक फार्मा लॉबी के प्रतिनिधि ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि हर तरल दवा जैसे सिरप और ड्रॉप्स में इस्तेमाल होने वाले ग्लिसरीन, प्रोपाइलीन ग्लाइकॉल और सॉल्वेंट्स महंगे हो गए हैं।

सरकार दवाओं की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए एनपीपीए के जरिए काम करती है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जरूरी दवाएं आम आदमी की पहुंच में रहें। इस साल की बढ़ोतरी पिछले कुछ सालों की तुलना में काफी कम है, जो उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाली यह छोटी सी बढ़ोतरी दवा उद्योग की बढ़ती लागत को ध्यान में रखकर की गई है। हालांकि, आम आदमी को थोड़ा ज्यादा खर्च करना पड़ेगा, लेकिन यह सुनिश्चित करेगी कि दवाएं बाजार में उपलब्ध रहें। सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वे इस मामले पर नजर रखेंगे ताकि आम आदमी को ज्यादा परेशानी न हो।