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बिजली में नहीं, बिलों में है करंट – ओम पटेल

मकड़ाई समाचार हरदा। मध्यप्रदेश राज्य खपत क्षमता से ज्यादा उत्पादन कर रहा है। इसके बाद भी उपभोक्ताओं पर बोझ बड रहा है। सबसे ज्यादा कृषि उपभोक्ताओं को मिलने वाली बिजली के दाम बड़े है। उद्योग में 68 प्रतिशत एवं घरेलु में 58 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। 10 वर्ष पहले घरेलु बिजली 1 यूनिट 4 रूपए थी जो आज बढ़कर 6.42 तक पहुँच चूँकि है। बिजली सेक्टर में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारियों को ओर बढ़ने का क्षेत्र खुल गया। निजी कंपनीयां को फायदा कमाने के लिए ही आएँगी न की सेवा करने के लिए, 25 सालो के लिए कोई भी निजी कंपनी इस क्षेत्र में आकर अपनी मनमानी करेंगी। जिसका सीधा – सीधा असर 85 प्रतिशत घरेलु एवं किसान उपभोक्ता पर पड़ेगा।

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शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के घरेलु उपभोक्ताओं को मीटर रीडरो की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। हर उपभोक्ता से बिजली विभाग मेंटेनेंस के नाम पर कुछ राशि वसूलता है। जिसका की कोई निश्चित मापदंड नहीं है। यह राशी प्रतिबिल में बढती घटती रहती है। मेंटेनेंस के नाम पर कभी कम तो कभी मनमानी राशी बिल के माध्यम से वसूली जाति है। विभाग द्वारा बिना कोई वाजिब कारण के मनमाने ढंग से बिजली कटौती की जाति है। ग्रामीण क्षेत्रों मे 2 – 3 दिनों तक उपभोक्ताओं को बिजली विभाग द्वारा छोटी-मोटी खराबी न सुधरने के कारण अँधेरे में रहना पढता है। शहरी एवं ग्रामीण उपभोक्ताओं को समय पर बिजली बिल न वितरण होने से छोटे व् गरीब उपभोक्ताओं को 2 से 3 माह का बिजली बिल एक साथ थमा दिया जाता है।

जिससे उपभोक्ताओं पर ब्याज के साथ भारी भरकम आर्थिक बोझ बढ़ता है। ग्रामीण क्षेत्र में अधिकत्तर 12 माह का बिजली बिल उपभोक्ताओं को एक साथ थमा दिया जाता है। समय पर उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण न हो पाना भी विभाग की एक बड़ी लापरवाही दर्शाता है। आमजनों से अपील है जिनके भी बिजली की कोई समस्या हो तो वह जिला कांग्रेस कार्यालय में आकर दे सकता है। यदि उक्त समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द नहीं होता है तो आमजनों किसानो के लिए जिला कांग्रेस आन्दोलन करेगी।