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6 मार्च को सिंहपुरी में विश्व की अनूठी व सबसे बड़ी वैदिक होली,5 से 7 हजार कंडों का उपयोग होगा

मकड़ाई समाचार धर्म अध्यात्म | फाल्गुन पूर्णिमा पर 6 मार्च को सिंहपुरी में विश्व की अनूठी व सबसे बड़ी वैदिक होली बनाई जाएगी। होली में 5 से 7 हजार ओपले अर्थात कंडों का उपयोग होगा। सिंहपुरी की गुरु मंडली वेद मंत्रों के माध्यम से कंडे बनाती है। इन्हीं कंडों से होलिका बनाई जाएगी। होली के दिन प्रदोष काल में चारों वेद के ब्राह्मण अलग-अलग मंत्रों से होलिका का पूजन करेंगे। अवंतिका तीर्थ क्षेत्र अपने आप में विशिष्टता लिए हुए है।

 पर्यावरण के संरक्षण का संदेश

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यहां पर पौराणिक मान्यता तो है ही, परंपराओं का भी अपना विशेष महत्व है। क्योंकि यह परंपरा ही वेदों के दृष्टिकोण से रीति-रिवाजों का निर्धारण करती आ रही है। सिंहपुरी की कंडा होली पर्यावरण के संरक्षण का भी संदेश देती है। इस होली में लकड़ियों का उपयोग बिल्कुल भी नहीं होता है। होलिका का दहन मंत्र के माध्यम से होता है, जो कि अलग-अलग वेदों से संबद्ध है। यहां पर होली का जमाने से लेकर दहन काल तक का समय मंत्रोच्चार के द्वारा एवं परंपरागत वाक्यों के द्वारा संपादित किया जाता है।

 गोबर से बनाए गए पान तथा नारियल आदि अर्पित करते हैं 

श्री गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज सिंहपुरी के द्वारा होलिका की परंपरा अति प्राचीन है। शताब्दियों से यहां पर ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद के मंत्र के माध्यम से ओपले का निर्माण किया जाता है। प्रदोष काल के समय होलिका पर इनका स्थापन किया जाता है।परंपरा में इनकी मान्यता प्राकृतिक संतुलन के लिए पुराण में होलिका के विषय में बहुत कुछ कहा गया है। प्रदोष काल में होलिका पूजन के समय सुहागिन महिलाओं को होलिका की संतुष्टि के लिए गोबर से बनाए गए पान तथा नारियल आदि अर्पित करना चाहिए। यह पारिवारिक सुख शांति के साथ-साथ उत्तम स्वास्थ्य, निरोगी काया, दीर्घायु और सौभाग्य को देने वाली मानी जाती है।