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हरदा में कुल देवता की ‘टिपारी’ को लेकर विवाद: समाज ने जताया विरोध, एसडीएम पर पक्षपात का आरोप

हरदा, – हरदा के टंकी मोहल्ले में कुल देवता दुल्हादेव बाबा की ‘टिपारी’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। वार्ड क्रमांक 1 के पार्षद पति कैलाश कुचबंदिया पर समाज की धरोहर को जबरन कब्जे में रखने का आरोप लगा है। समाज के लोगों ने कहा कि ‘टिपारी’ किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरी समाज की संपत्ति है, और इसे कैलाश कुचबंदिया ने अपने घर में जबरन रख लिया है।

समाज का विरोध और प्रशासन की भूमिका पर सवाल

समाज के करीब 150 लोगों ने ₹50 के स्टांप पर नोटरी करवा कर शपथ पत्र दिया था, जिसमें कैलाश कुचबंदिया के खिलाफ आपत्ति दर्ज की गई थी। बावजूद इसके, प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। समाज के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि ‘टिपारी’ वापस नहीं मिली, तो वे हर स्तर पर संघर्ष करेंगे और आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

पूनम कुचबंदिया ने उठाए सवाल

पूनम कुचबंदिया और उनके परिवार ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा कि:

1. हमारे समाज में शादी-विवाह और अन्य कार्यक्रमों में ‘टिपारी’ की महत्वपूर्ण भूमिका है।

2. पूनम कुचबंदिया और उनका परिवार कैलाश कुचबंदिया को कार्यक्रम में नहीं बुलाना चाहते।

3. वे कैलाश कुचबंदिया से ‘टिपारी’ की पूजा भी नहीं कराना चाहते।

4. कुल देवता दूल्हा देव बाबा की पूजा परिवार का कोई भी व्यक्ति कर सकता है।

5. 5 से 7 तारीख के बीच मेरे बेटे वीरेंद्र की शादी है, जिसमें कुल देवता की ‘टिपारी’ की आवश्यकता है।

6. मैंने लिखित आवेदन देकर 2 दिन के लिए कुल देवता की ‘टिपारी’ प्रशासन से मांगी थी, लेकिन वह वर्तमान में कैलाश कुचबंदिया के मकान में रखी हुई है।

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7. मेरा कैलाश कुचबंदिया से पारिवारिक विवाद चल रहा है।

8. मैं अपने बेटे की शादी और अन्य कार्यक्रमों में कैलाश कुचबंदिया को नहीं बुलाना चाहता।

9. लेकिन हरदा एसडीएम जबरन दबाव डाल रहे हैं कि मुझे कैलाश कुचबंदिया को बुलाना पड़ेगा।

10. अगर शादी में कुल देवता की ‘टिपारी’ नहीं मिली, तो मेरे बेटे की शादी नहीं हो पाएगी।

11. प्रशासन जिस स्थिति में मुझे कुल देवता दुल्हादेव बाबा की ‘टिपारी’ दिलवाएगा, उसी स्थिति में शादी संपन्न होने के बाद मैं ‘टिपारी’ लौटा दूंगा।

एसडीएम पर पक्षपात और राजनीतिक दबाव के आरोप

समाज के लोगों ने आरोप लगाया है कि एसडीएम राजनीतिक दबाव में गलत निर्णय ले रहे हैं और आम जनता को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि परिवार के किसी भी सदस्य को कुलदेवता की पूजा करने का अधिकार है, एसडीएम जबरन कैलाश कुचबंदिया की पूजा को अनिवार्य बना रहे हैं, जिससे समाज में नाराजगी बढ़ रही है।

धरने और आंदोलन की चेतावनी!

यदि समाज को ‘टिपारी’ नहीं मिली, तो वे कलेक्टर कार्यालय में धरना देंगे और इसे एक बड़े आंदोलन का रूप देंगे। समाज ने कहा कि धरोहर की रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, और यदि प्रशासन उचित निर्णय नहीं लेता है, तो इसके परिणाम प्रशासन को भुगतने होंगे।

न्याय की मांग

यह मामला धार्मिक आस्था, पारिवारिक परंपराओं और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौती बना हुआ है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले का समाधान कैसे निकालता है।