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6 साल में 10 लाख से अधिक भारतीयों ने छोड़ी नागरिकता

नई दिल्ली। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, बीते छह वर्षों में 10 लाख से अधिक भारतीय नागरिकों ने विदेशी नागरिकता ग्रहण करने के बाद भारतीय नागरिकता छोड़ दी है। राज्यसभा में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने इसकी जानकारी दी।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 5 से 11 और नागरिकता अधिनियम 1955 में नागरिकता प्राप्त करने और छोड़ने की व्यवस्था दी गई है। किसी अन्य देश की नागरिकता लेने पर व्यक्ति स्वत: भारतीय नागरिक नहीं रहता। इसके साथ ही पासपोर्ट अधिनियम के तहत अपना भारतीय पासपोर्ट जमा करना अनिवार्य होता है।

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मोदी सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2019 में 1,44,017, 2020 में 85,256, 2021 में 1,63,370, 2022 में 2,25,620, 2023 में 2,16,219, 2024 में 2,06,378 लोगों ने नागरिकता छोड़ी है। मंत्री ने बताया कि 2024 में 2.06 लाख भारतीयों ने नागरिकता छोड़ी। यह संख्या 2023 की तुलना में कुछ कम है, लेकिन 2022 से लगातार हर वर्ष दो लाख से अधिक लोग भारतीय नागरिकता छोड़ रहे हैं।

नागरिकता छोड़ने की प्रक्रिया के तहत पर आवेदन करना पड़ता है। इसके बाद पासपोर्ट और दस्तावेजों का सत्यापन होता है। सभी औपचारिकताओं के बाद 30 दिनों के भीतर ह्यत्याग प्रमाणपत्रह्ण जारी होता है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि नागरिकता छोड़ने का निर्णय व्यक्तिगत होता है और इस पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है, लेकिन पासपोर्ट अधिनियम का पालन अनिवार्य है।