भोपाल। राजधानी भोपाल के रविंद्र भवन स्थित सभागार में बुधवार को मध्य प्रदेश शिखर खेल अलंकरण एवं 38वें नेशनल गेम्स 2025 के पदक विजेता खिलाड़ियों का सम्मान किया गया। इसमें विभिन्न श्रेणी के 82 खिलाड़ी शामिल थे। इनमें 34 स्वर्ण, 25 रजत और 23 कांस्य पदक विजेता शामिल थे। इस वर्ष 12 विक्रम, 11 एकलव्य, 3 विश्वामित्र और एक लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिए गए हैं। इस साल 3 अनुभवी कोच को भी विश्वामित्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इन सभी खिलाड़ियों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुरस्कार प्रदान किए।
राम ने खिलाड़ी भावना को ऐसे अपनाया
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि “हमें अच्छा खिलाड़ी बनने के लिए यह देखना पड़ेगा कि राम और कृष्ण के जीवन का टर्निंग प्वाइंट किस जगह है। जब राम की तरुणावस्था होती है, उस समय उनके यहां गुरु विश्वामित्र आते हैं. वो राजा दशरथ से सेना नहीं मांगते, वो राक्षसों का विनास करने के लिए युवाओं की मांग करते हैं। इसके बाद युवा कैसे बदलता है, यह बताने की जरुरत नहीं. यदि विश्वामित्र राम को लेकर जंगल में ना जाते और उनको मरीचि और जटायु जैसों को मारने का काम नहीं देते तो क्या राम अच्छे खिलाड़ी बनते, लेकिन राम ने खिलाड़ी भावना के आधार पर अपने जीवन को गौरावन्वित किया।
खेल जीवन में हमें ये सब दे सकता है
मुख्यमंत्री ने कहा कि राम भगवान ने जिस प्रकार अपनी क्षमता, योग्यता और बुद्धि से महाविजय प्राप्त की, उसी प्रकार राजा जनक के दरबार में धनुष तोड़ने की शक्ति दिखाई, वो भी खिलाड़ी भावना का ही प्रतीक है। खेल हमको जीवन क्या दे सकता है। ये भगवान राम से सीखना चाहिए। खेल हमको क्या-क्या दे सकता है। यह दुश्मनों को मुक्ति देता है. घर में माता सीता देता है, पराक्रम और पुरुषार्थ देता है।

