देहरादून। बादल फटने से हुई तबाह धराली की मलबे में रुंध गईं। आपदा के चलते सड़कों का नाता टूट गया। अलग-थलग पड़ा उच्च हिमालय का कातर को हमदर्द और हौसले की सख्त जरूरत थी। ऐसी विपदा में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दो दिन तक ग्राउंड जीरो पर मोर्चा संभाला। उन्होंने प्रशासनिक क्षमता के साथ प्रदेश के राजनीतिक नेतृत्व के रूप में मजबूत छवि गढ़ी। देहरादून से लेकर उत्तरकाशी तक पूरा तंत्र सक्रिय रहा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आपदाग्रस्त क्षेत्रों में सीएम धामी सबसे पहले पहुंचे तो पीड़ित भी अपने बीच उन्हें पाकर उनके कंधे पर सिर रखा रोने लगे। सांत्वना और विश्वास के रूप में धामी उनके बीच थे। उत्तरकाशी जिले में 2023 के नवंबर माह में सिलक्यारा में निर्माणाधीन सुरंग ढहने से 41 श्रमिक फंस गए थे। आपदा की उस घड़ी में भी धामी ने सरकार के नेतृत्वकर्ता के रूप में मौके पर डेरा डाला था। केंद्र से मिल रहा निरंतर सहयोग उनकी मौके पर मौजूदगी से और प्रभावी बन गया था। तब भी धामी ने प्रशासनिक क्षमता के साथ प्रदेश के राजनीतिक नेतृत्व के रूप में अपनी छवि राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित की थी।
धराली आपदा के मौके पर धामी एक बार फिर उत्तरकाशी जिले में प्रभावितों के बीच पहुंच गए। विगत मंगलवार को आंध्र प्रदेश का दौरा बीच में छोड़कर देर सायं देहरादून लौटे धामी सीधे राज्य आपदा परिचालन केंद्र पहुंचे। राहत को मिशन बनाकर सीएम दो दिन से ग्राउंड जीरो पर हैं। राहत और बचाव कार्यों को युद्ध स्तर पर संचालित करने के साथ-साथ वह पल-पल की जानकारी ले रहे हैं। हर स्तर पर व्यवस्था पर सीएम की नजर है। परिणामस्वरूप आपदा प्रबंधन की पूरी मशीनरी 24 घंटे क्रियाशील है।
शासन के वरिष्ठ अधिकारी देहरादून स्थित राज्य आपदा परिचालन केंद्र के जरिए से सीएम के साथ ही राहत व बचाव दलों के संपर्क में लगातार बने हुए हैं। सड़क संपर्क और पुल से कटे होने के कारण हेली सेवाओं ने राहत व बचाव कार्यों को गति देने में भूमिका निभाई। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, आइटीबीपी व अन्य केंद्र व राज्य की एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय का प्रभाव साफ दिया।

