भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और रहली सीट से बीजेपी विधायक गोपाल भार्गव ने अपने भोपाल स्थित सरकारी बंगले को पूरी तरह से मरीजों और उनके परिजनों के लिए समर्पित कर दिया है। पिछले 23 साल से जारी यह मिशन अब और आधुनिक और सुविधायुक्त हो गया है।
भार्गव की पुत्रवधु शिल्पी भार्गव ने इस आवास में एक अनोखा बदलाव किया है। उन्होंने दिल की बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के लिए एक खास किड्स गेस्ट रूम डिजाइन करवाया है, जो प्ले स्कूल की तरह दिखता है। यही नहीं, दीवारों पर कार्टून पेंटिंग्स, खिलौने और झूले लगाए गए हैं ताकि गंभीर बीमारी के बीच भी बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य ठीक रहे।
गोपाल जी की रसोई’ और रुकने का इंतजाम फ्री
बंगले में मरीजों के लिए सिर्फ छत ही नहीं, बल्कि सम्मानजनक भोजन की भी व्यवस्था है। बंगले के बड़े हिस्से में 70 नए बेड, फ्रेश चादर, तकिया और कंबलों का इंतजाम भी है।
इसके अलावा, यहां रुकने वाले मरीज और उनके परिजनों के लिए ‘गोपाल जी की रसोई’ भी बनाई गई है. इसमें मटर पनीर, मलाई कोफ्ता से लेकर दलिया और खिचड़ी तक, घर जैसा पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन दिया जाता है। ठहरने से लेकर नाश्ता और दोनों समय का भोजन पूरी तरह मुफ्त है।
बच्चों के लिए प्ले स्कूल की तरह बनाया गेस्ट रूम गोपाल भार्गव की पुत्रवधु शिल्पी भार्गव ने बीमार बच्चों विशेषकर जिन्हें दिल से जुड़ी बीमारियां हैं उनके ठहरने के लिए एक खास गेस्ट रूम प्ले स्कूल की तर्ज पर तैयार कराया है। इस किड्स गेस्ट रूम में बच्चों के लिए झूला, खिलौने से लेकर बच्चों के लिए स्पेशल बेड की व्यवस्था की है। बीमार बच्चों का मूड ठीक रखने के लिए दीवारों पर कार्टून और आकर्षक पेंटिंग्स बनवाई हैं।
‘फ्री एंबुलेंस’ की सुविधा
हर रविवार सुबह 11 बजे गढ़ाकोटा (सागर जिला) स्थित ‘गणनायक’ निवास से एंबुलेंस मरीजों को लेकर करीब 250 किमी का सफर कर भोपाल आती है। भोपाल में मरीजों को अस्पताल ले जाने और वापस लाने के लिए निजी वाहन और एंबुलेंस 24 घंटे तैनात रहते हैं। बंगले पर प्राथमिक इलाज, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और इमरजेंसी के लिए सेवक मौजूद रहते हैं।
निजी खर्च और आयुष्मान का साथ
गोपाल भार्गव के अनुसार, सरकारी बंगले का ढांचा भले ही सरकारी हो, लेकिन अंदर की तमाम व्यवस्थाएं, बिस्तर, एंबुलेंस का ईंधन और भोजन का खर्च वह खुद के निजी फंड से वहन करते हैं।
पहले आयुष्मान कार्ड या मुख्यमंत्री सहायता निधि से मदद ली जाती है, अगर वहां से संभव न हो तो भार्गव स्वयं इलाज का खर्च उठाते हैं भार्गव ने बताया कि दुर्भाग्यवश यदि किसी मरीज की मृत्यु हो जाती है, तो पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक उनके गृह ग्राम तक पहुंचाने के लिए विशेष वाहन की व्यवस्था भी निशुल्क है।
विधायक गोपाल भार्गव ने बताया कि यह मिशन 2004 से निरंतर जारी है। अब तक तकरीबन 30 हजार गरीब मरीज इस व्यवस्था का लाभ उठा चुके हैं। उनका मानना है कि यह सब इंतजाम इसलिए किए जा रहे हैं ताकि कोई भी व्यक्ति धन के अभाव में इलाज से वंचित न रहे और न ही इलाज के बोझ तले कर्जदार बने।

