कुलहरदा में 100 साल पुराना जर्जर मकान भरभराकर गिरा, प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल दो माह पहले दी गई थी सूचना, नगरपालिका ने नोटिस जारी किया लेकिन कार्रवाई नहीं की; आधा मकान अब भी बना हुआ है खतरा
हरदा। शहर के वार्ड क्रमांक 22 स्थित कुलहरदा में दुर्गा मंदिर के पीछे शुक्रवार सुबह करीब 7:14 बजे एक करीब 100 साल पुराना जर्जर मकान अचानक भरभराकर धराशायी हो गया। हादसे के समय मकान में किराएदार का परिवार मौजूद था। गनीमत रही कि घटना में कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई।
जानकारी के अनुसार मकान जावेद अहमद पटेल पिता स्व. सैय्यद मोहसिन अली का बताया जा रहा है। मकान नजूल शीट क्रमांक 17-डी, भूखंड क्रमांक 8/1 पर स्थित है।
पहले ही प्रशासन को दी गई थी सूचना
मकान की जर्जर स्थिति को लेकर जावेद पटेल द्वारा 4 जून 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) हरदा एवं नगरपालिका परिषद हरदा को लिखित आवेदन देकर स्थिति से अवगत कराया गया था। आवेदन में मकान के एक हिस्से के पहले ही क्षतिग्रस्त होने तथा दूसरे हिस्से की दीवार के बेहद जर्जर होने की जानकारी दी गई थी।
बताया गया कि सीएमओ एवं तहसीलदार द्वारा मौके का निरीक्षण भी किया गया था। वहीं नगरपालिका की भवन निर्माण शाखा द्वारा नोटिस क्रमांक 299 जारी कर सात दिन के भीतर जर्जर भवन को स्वयं हटाने के निर्देश दिए गए थे। नोटिस में कार्रवाई नहीं करने की स्थिति में नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 221 के तहत निकाय द्वारा भवन गिराने की बात कही गई थी।
इसके बावजूद समय रहते मकान को सुरक्षित तरीके से नहीं हटाया गया और आखिरकार शुक्रवार सुबह उसका एक हिस्सा धराशायी हो गया।
स्कूल की छुट्टी से टला बड़ा हादसा
स्थानीय रहवासियों के अनुसार यह रास्ता आबकारी रोड से जुड़ा है और यहां से रोजाना बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे और राहगीर गुजरते हैं। शुक्रवार को स्कूल की छुट्टी होने के कारण रास्ते पर बच्चों की मौजूदगी नहीं थी, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
आधा मकान अभी भी हवा में लटका, खतरा बरकरार
मकान का एक हिस्सा गिरने के बाद भी बाकी आधा हिस्सा असुरक्षित स्थिति में खड़ा है। इसके नीचे किराएदार का सामान भी रखा हुआ बताया जा रहा है। ऐसे में बचा हुआ हिस्सा कभी भी गिर सकता है।
रहवासियों ने नगरपालिका एवं प्रशासन से मांग की है कि बचे हुए जर्जर हिस्से को तत्काल सुरक्षित तरीके से हटाया जाए, ताकि किसी तरह की जनहानि न हो। लोगों ने कहा कि यदि अब भी समय रहते कार्रवाई नहीं की गई और कोई हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक अमले की होगी।

