पलासनेर पंचायत के भ्रष्टाचार मामले में तनाव, पत्रकारों पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच करे प्रशासन !! पत्रकारों ने स्वयं कलेक्टर व एएसपी को सौंपा ज्ञापन !
हरदा : जिले के पलासनेर गांव में भ्रष्टाचार की जांच ने नया मोड़ ले लिया है। ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर पत्रकारों ने शिकायत ओर लगाए गए आरोपों के आधार पर खबरों का प्रकाशन कर जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया था।
इसी दौरान ग्रामीणों ने जिला जनसुनवाई कलेक्टर सहित संभाग आयुक्त को भी लिखित शिकायत करते हुए।
गांव के सरपंच सचिव रोजगार सहायक , इंजीनियर की के ऊपर शासकीय राशि का दुरुपयोग कर गबन का आरोप लगाया था। इसके अलावा सरकारी योजनाओं जैसे सड़क निर्माण, स्ट्रीट लाइट, तालाब, और फर्जी मजदूरों के नाम पर राशि डाले जाने के आरोप लगाए थे
जिसकी जांच चल रही थी। इसी दौरान बीते दिनों जांच टीम गांव पहुंची। ओर पंचायत सचिव ओमप्रकाश गुर्जर की मृत्यु हो गई।
अब इस मामले में गांव की सरपंच ने दो पत्रकारों राजेंद्र बिल्लौरे, अमित बिल्ले के उपर मानसिक दबाव बनाने 50 हजार मांगने का आरोप लगा दिया। इसको लेकर अब पत्रकारों में आक्रोश है।
आज बड़ी संख्या में पत्रकारों ने हरदा कलेक्टर ओर पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही कहा है कि निष्पक्ष जांच उपरांत ही आगे जो भी दोषी हो उसके विरुद्ध कार्यवाही करे।
पत्रकारों ने कहा कि शिकायतों पर खबर लगाना, ओर भ्रष्टचार की खबर लगाने के बाद मामले को दबाने के लिए प्रशासन को गुमराह किया जा रहा। जिसके कारण पत्रकारों की छबि धूमिल हो रही है।
पत्रकारों ने ये भी कहा दिवंगत पंचायत सचिव ओमप्रकाश गुर्जर सचिव के जीवनकाल में कोई भी शिकायत या दबाव नहीं था। यह सब राजनीति और दबाव की राजनीति का हिस्सा अधिक लग रहा है।
पत्रकारों ने स्वयं कहा कि शिकायतकर्ता, पत्रकारों और संबंधित अधिकारियों की कॉल डिटेल्स और लोकेशन की निष्पक्ष जांच।
ग्रामीण शिकायतों के आधार पर की गई की जांच में यदि सरपंच के आरोप गलत पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी मनगढ़ंत शिकायतों से बचा जा सके।
पलासनेर के पत्रकारों ने स्पष्ट किया कि चौथा स्तंभ—मतलब पत्रकारिता—झूठे आरोपों और दबावों से डरने वाला नहीं है। अगर निष्पक्षता पर खतरा पहुंचाया गया तो वे और सख्त कदम उठाने को मजबूर होंगे।

