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20 बच्चों की जान बचाने के लिए महिला खुद को किया मधुमक्खियों के हवाले, मासूमों की जान बचाने के बाद तोड़ा दम

नीमच। मध्य प्रदेश के नीमच जिले के रानपुर गांव में मानवता और ममता की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसे सुनकर हर किसी की आंख नम हो गई। मडावदा पंचायत के आंगनवाड़ी केंद्र पर जब अचानक मधुमक्खियों के खूंखार झुंड ने हमला किया, तो वहां मौजूद कंचन बाई मेघवाल ने अपनी जान की परवाह ना करते हुए मौत से मुकाबला किया। कंचन बाई मेघवाल ने 20 मासूम बच्चों को बचाने के लिए खुद की जिंदगी न्योछावर कर दी।

तिरपाल और दरी से ढककर 20 बच्चों की जान बचाई

पूरा मामला सोमवार को मडावदा पंचायत के आंगनवाड़ी केंद्र का है। जिस समय परिसर में खेल रहे मासूम बच्चों पर मधुमक्खियां झपटीं, कंचन बाई उन्हें बचाने के लिए दौड़ पड़ीं। उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए बच्चों को तिरपाल और दरी से ढका और एक-एक कर करीब 20 बच्चों को सुरक्षित कमरों के अंदर पहुंचाया। मासूमों को मौत के मुंह से निकालने के इस प्रयास में हजारों मधुमक्खियों ने कंचन बाई को अपना निशाना बना लिया और उन पर टूट पड़ीं।

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आसपास के लोगों ने जब तक कंचन बाई को बचाने का प्रयास किया, तब तक वे बुरी तरह घायल हो चुकी थीं। सूचना पर पहुंची डायल 112 के आरक्षक कालूनाथ और पायलट राजेश राठौर ने उन्हें तत्काल सरवानिया स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

बेटे-बेटियों के सिर से मां का साया उठा

कंचन बाई ना केवल आंगनवाड़ी में मध्यान भोजन बनाती थीं, बल्कि जय माता दी स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष के रूप में गांव की सक्रिय महिला भी थीं। उनकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, क्योंकि उनके पति शिवलाल पहले से ही पैरालिसिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और अब एक बेटे व दो बेटियों के सिर से मां का साया भी उठ गया है।

इस घटना के बाद से पूरे रानपुर गांव में मातम के साथ-साथ भारी दहशत व्याप्त है। आलम यह है कि गांव में पानी भरने का एकमात्र स्रोत वह हैंडपंप है, जो आंगनवाड़ी के पास लगा है, लेकिन मधुमक्खियों के उसी पेड़ पर जमा होने के कारण ग्रामीणों ने वहां जाना छोड़ दिया है। ग्रामीण अब प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं कि कब इन छत्तों को हटाकर क्षेत्र को सुरक्षित किया जाएगा।