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देवास : 4 साल की नंदिनी ने कैंसर से जीतकर दिखाई अद्भुत हिम्मत

देवास। नर्मदा भक्त तो आपने बहुत देखे होंगे। कोई 80 साल की उम्र में नर्मदा की परिक्रमा करता है, तो कोई युवा अवस्था में ही नर्मदा भक्ति से प्रेरित होकर परिक्रमा करने निकल पड़ता है। लेकिन आज हम आपको 4 साल की एक ऐसी मासूम बच्ची की कहानी बता रहे हैं, जिसकी मां नर्मदा के प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति ने कैंसर जैसी बीमारी से जंग जीतने के बाद उसे नर्मदा परिक्रमा तक पहुंचा दिया।

देवास के गांव से निकली आस्था की अनोखी यात्रा

देवास जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाले राधेलाल लोंगरे अपनी पत्नी प्रसादी और 4 साल की मासूम पोती नंदिनी के साथ नर्मदा परिक्रमा कर रहे हैं। कैंसर जैसी घातक बीमारी से जंग लड़कर पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी नंदिनी 3000 किलोमीटर लंबी मां नर्मदा की परिक्रमा कर रही है। इस मासूम बच्ची को देखकर आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि इसने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पर जीत हासिल की है। महज 7 माह की उम्र में नंदिनी को गले का कैंसर हो गया था। एक साल की उम्र होते-होते कैंसर ने बड़ा रूप ले लिया था।

इलाज के बाद भी जवाब दे चुके थे डॉक्टर

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इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहरों में नंदिनी के परिवार ने उसका इलाज कराया। ढाई साल की उम्र तक कैंसर ने भयानक रूप ले लिया था। डॉक्टरों ने कैंसर का इलाज तो कर दिया, लेकिन परिजनों से कह दिया कि अब नंदिनी चंद दिनों की ही मेहमान है। ऐसे में नंदिनी के दादा-दादी ने फैसला किया कि अब वे मां नर्मदा से ही नंदिनी को नया जीवन देने की प्रार्थना करेंगे। उन्होंने संकल्प लिया कि अगर नंदिनी ठीक हो जाती है, तो वे नर्मदा परिक्रमा पर निकलेंगे।

संकल्प के बाद बदली नंदिनी की जिंदगी

नंदिनी के दादा बताते हैं कि जब उन्होंने नर्मदा नदी के किनारे यह संकल्प लिया और मां नर्मदा के भरोसे ही नंदिनी को छोड़ दिया, तो एक अद्भुत चमत्कार हुआ। महज 3 महीने के भीतर नंदिनी की सभी जांच रिपोर्ट सामान्य आ गईं और डॉक्टरों ने कहा कि अब नंदिनी पूरी तरह से ठीक हो गई है। मां नर्मदा की असीम कृपा से नंदिनी आज पूरी तरह स्वस्थ है। यही वजह है कि परिवार ने नर्मदा परिक्रमा करने का फैसला किया और नंदिनी भी उनके साथ पैदल चलकर मां नर्मदा की परिक्रमा कर रही है।

4 साल की उम्र में आरती और जयकारों से भावुक करती नंदिनी

नंदिनी की उम्र अभी 4 साल है। इतनी छोटी उम्र में वह नर्मदा आरती भी गा लेती है और “नर्मदे हर” के जयकारे भी लगाती है। जो भी नंदिनी को परिक्रमा करते हुए देखता है, वह भाव-विभोर हो जाता है। नंदिनी की दादी कहती हैं कि उनकी नंदिनी आज केवल मां नर्मदा की कृपा से ही जिंदा है। परिवार रोजाना तकरीबन 15 से 20 किलोमीटर पैदल चलता है और इस कठिन परिक्रमा में नंदिनी भी बराबरी से कदम से कदम मिलाकर चलती है. नंदिनी को नया जीवन देकर मां नर्मदा ने उनके परिवार पर असीम कृपा की है।