“पहले जगह दो, फिर हटाओ”: प्रशासन को उमा की खरी-खरी
गरीब दुकानदारों के समर्थन में उतरीं पूर्व मुख्यमंत्री उमा दीदी
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 टीकमगढ़ । मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती एक बार फिर अपने तेवर और जन-सरोकार के लिए चर्चा में हैं। मंगलवार (7 अप्रैल) की सुबह टीकमगढ़ की सड़कों पर एक अलग ही नजारा देखने को मिला। सिविल लाइन रोड स्थित अपने बंगले के बाहर उमा भारती ने खुद एक हाथठेले की कमान संभाली और वहां पोहा-जलेबी बेचना शुरू कर दिया। उनके इस कदम का उद्देश्य उन छोटे दुकानदारों का समर्थन करना था, जिनके ठेले प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर एक दिन पहले ही हटा दिए थे।
प्रशासन की कार्रवाई पर जताई कड़ी आपत्ति
दरअसल, सोमवार को स्थानीय प्रशासन, एसडीएम और नगर पालिका की टीम ने जेसीबी के साथ सिविल लाइन इलाके में अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया था। इस दौरान कई छोटे व्यापारियों की रोजी-रोटी का साधन छिन गया था। उमा भारती ने इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए कहा कि गरीबों की आजीविका पर प्रहार करना गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे दुकानदारों के साथ खड़ी हैं और उन्हें दोबारा वहीं दुकानें लगाने के लिए प्रोत्साहित किया।
विरोध प्रदर्शन की प्रमुख झलकियां
दुकानदारों का मनोबल बढ़ाया
उमा भारती ने स्वयं पोहा-जलेबी बनाकर ग्राहकों को खिलाया, जिससे वहां लोगों का तांता लग गया।
बच्चों के साथ स्नेह
पोहा बेचते समय उन्होंने एक छोटी बच्ची को बड़े प्यार से प्लेट सजाकर दी, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।
उमा दीदी की प्रशासन को सीधी चेतावनी
उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन इन दुकानदारों के लिए वैकल्पिक स्थान (Vendors Zone) चिह्नित नहीं कर देता, तब तक इन्हें यहां से नहीं हटाया जाना चाहिए।
“पहले जगह दो, फिर हटाओ”: प्रशासन को उमा की खरी-खरी
पार्षदों के सुझावों को नजरअंदाज करने का आरोप
उमा भारती ने मीडिया से चर्चा करते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि स्थानीय पार्षदों ने पहले ही प्रशासन को तीन-चार ऐसी जगहों का सुझाव दिया था जहाँ इन ठेलों को व्यवस्थित रूप से शिफ्ट किया जा सकता था। इसके बावजूद प्रशासन ने बिना किसी ठोस योजना के जेसीबी चलाकर गरीबों के पेट पर लात मारने का काम किया।
जिम्मेदारी लेने का संकल्प
जब उनसे पूछा गया कि क्या इस विषय पर अधिकारियों से चर्चा हुई है, तो उन्होंने कहा:
“मुझे इस कार्रवाई की जानकारी देरी से मिली। मैं अभी प्रशासन से बात करूंगी और सुनिश्चित करूंगी कि सभी विस्थापित दुकानदार वापस अपनी जगह पर लौटें। मैं उनके ठेलों को हटने नहीं दूंगी।”
क्या होगी अब आगे की रणनीति
पूर्व मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख के बाद स्थानीय प्रशासन पर अब दबाव बढ़ गया है। उमा भारती ने स्पष्ट कर दिया है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास की वेदी पर गरीबों की रोजी-रोटी की बलि नहीं चढ़नी चाहिए। फिलहाल, उनके आश्वासन के बाद दुकानदार फिर से अपने स्थान पर लौटने की तैयारी कर रहे हैं।

