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विवाद के बाद कांग्रेस अध्यक्ष के सुर नरम: गुजरात पर दिए बयान पर मल्लिकार्जुन खरगे ने मांगी माफी

मकड़ाई एक्सप्रेस 24 नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम । केरल के चुनावी मैदान से शुरू हुआ ‘साक्षरता बनाम राजनीति’ का विवाद अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की माफी के साथ शांत होता नजर आ रहा है। गुजरात के लोगों को लेकर दिए गए अपने विवादास्पद बयान पर चौतरफा घिरने के बाद, खरगे ने स्पष्ट किया है कि उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया।

विवाद की जड़: केरल की रैली और ‘अशिक्षित’ वाला बयान

बीते रविवार को केरल के इडुक्की में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर तीखा हमला बोला था। इस दौरान उन्होंने तुलना करते हुए कहा था कि केरल की जनता अत्यधिक शिक्षित और जागरूक है, इसलिए उन्हें गुमराह करना संभव नहीं है। विवाद तब बढ़ा जब उन्होंने कथित तौर पर गुजरात के मतदाताओं की साक्षरता और समझ पर सवाल उठा दिए। उनके इस बयान को भाजपा ने “गुजरात अस्मिता” का अपमान बताते हुए मुद्दा बना लिया।

भाजपा का पलटवार और राहुल गांधी से सवाल

खरगे के बयान के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस टिप्पणी को “बेशर्मी भरा और निंदनीय” करार दिया। भाजपा ने सीधा हमला बोलते हुए पूछा कि क्या राहुल गांधी अपने अध्यक्ष के इस विचार से सहमत हैं? भाजपा नेताओं का तर्क था कि एक पूरे राज्य के लोगों को ‘अनपढ़’ कहना कांग्रेस की कुंठित मानसिकता को दर्शाता है।

सोशल मीडिया पर माफीनामा और सफाई

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दबाव बढ़ता देख मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) के जरिए अपना पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

👉🏻उनकी बातों को जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया गया है।

👉🏻 गुजरात और वहां के निवासियों के प्रति उनके मन में सदैव सर्वोच्च सम्मान रहा है।

👉🏻यदि किसी की भावनाओं को ठेस पहुँची है, तो वे इसके लिए दिल से खेद व्यक्त करते हैं।

चुनावी माहौल में साक्षरता पर सियासत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल जैसे उच्च साक्षरता दर वाले राज्य में मतदाताओं को लुभाने के चक्कर में खरगे ने यह बयान दिया था। उन्होंने रैली में जोर देकर कहा था कि केरल की जनता “बहुत चतुर” है और वह किसी के बहकावे में नहीं आने वाली। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य को इस बहस में घसीटना कांग्रेस के लिए भारी पड़ गया, जिसके चलते अंततः पार्टी नेतृत्व को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा।

कांग्रेस अध्यक्ष ने अब यह साफ कर दिया है कि उनका इरादा किसी भी क्षेत्र या राज्य के लोगों का अपमान करना नहीं था, बल्कि वे केवल केरल की राजनीतिक समझ की प्रशंसा कर रहे थे।