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गोटमार मेला क्या है……? – जानिए कहां और कब होता है ये खूनी खेल और इस साल क्या हुआ

भोपाल/पांढुर्णा। सोशल मीडिया पर इसे निमाड़ का मेला बताया जाता है, लेकिन हकीकत ये है कि विश्व प्रसिद्ध गोटमार मेला *मध्यप्रदेश के सबसे नए जिले पांढुर्णा में लगता है*, जो महाराष्ट्र बॉर्डर से सटा है।

कहां और कब होता है गोटमार…..?

मेला पांढुर्णा शहर के बीच से बहने वाली *जाम नदी* पर लगता है। नदी के एक तरफ पांढुर्णा गांव और दूसरी तरफ *सावरगांव* है।

हर साल *भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या, पोला पर्व के दूसरे दिन* यह मेला लगता है। इस साल 2026 में यह मेला *11 सितंबर, शुक्रवार* को आयोजित किया गया। सुबह 11 बजे से शुरू हुई पत्थरबाजी शाम साढ़े 6 बजे तक चली।

क्या है परंपरा? क्यों कहते हैं गोटमार?

स्थानीय बोली में *गोट = पत्थर*।

एक रात पहले जाम नदी के बीच पलाश का पेड़ काटकर गाड़ा जाता है। उस पर लाल कपड़ा, तोरण, नारियल और झंडा बांधकर पूजा होती है। दूसरे दिन पांढुर्णा पक्ष के लोग झंडा काटने के लिए नदी में घुसते हैं और सावरगांव पक्ष उन्हें रोकने के लिए पत्थर बरसाता है। जो पक्ष झंडा तोड़ लेता है, वह विजेता कहलाता है। झंडा टूटते ही दोनों पक्ष पत्थर फेंकना बंद कर गाजे-बाजे के साथ चंडी माता मंदिर में जाकर मिलाप करते हैं।

हर साल 300 से 600 लोग घायल होते हैं। अब तक एक दर्जन से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। प्रशासन अब इसे सिर्फ रस्म अदायगी तक सीमित करने की कोशिश कर रहा है।

क्यों खेला जाता है? – 300 साल पुरानी प्रेम कहानी

मान्यता है कि पांढुर्णा के एक लड़के को सावरगांव की लड़की से प्रेम था। लड़का लड़की को लेकर जाम नदी पार कर रहा था तभी सावरगांव वालों ने पत्थर फेंके, जवाब में पांढुर्णा वालों ने भी पत्थर चलाए और बीच में दोनों प्रेमियों की मौत हो गई। पछतावे में दोनों गांवों ने उनके शवों को चंडी माता मंदिर में रखकर पूजा की, तब से यह परंपरा चली आ रही है।

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दूसरी मान्यता 1740 की है जब देवगढ़ के राजा जाटवा और नागपुर के रघुजी भोंसले की सेना में तीर खत्म होने पर पत्थरों से युद्ध हुआ था।

इस साल का अपडेट,1326 घायल, 8 नागपुर रेफर, झंडा कटा तब जाकर रुका खून-खराबा

इस बार गोटमार में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा सामने आया है। कुल *1326 लोग घायल* हुए।

*8 गंभीर घायलों – सचिन हाटेकर, प्रीतम योगेश राउत, संजय धारपुरे (30), नितिन भादे (33), सचिन नासरे, कैलाश नंदू साहू, राजू कामडे और जीवन सलामे* को नागपुर रेफर किया गया है। किसी का पैर टूटा तो किसी का सिर और सीना फट गया।

शाम साढ़े 5 बजे पांढुर्णा के युवक ने कुल्हाड़ी से झंडा काटा और तब जाकर खेल रुका।

दो वायरल वीडियो:

1. झंडा काटने के दौरान टिन शेड गिरने से 3 युवक नीचे दब गए, फिर भी उन पर पत्थर बरसते रहे।

2. एक युवक गमछे की गोफन बनाकर पत्थर मारता दिखा, जबकि पुलिस ने गोफन पर बैन लगाया था।

विधायक भी मैदान में पांढुर्णा कांग्रेस विधायक नीलेश उईके खुद मैदान में उतरकर पत्थरबाजी करते नजर आए।

5 साल के बच्चे को लगा पत्थर

महाराष्ट्र के मोवाड से मेला देखने आए 5 वर्षीय योगेश मरावी के सिर में पत्थर लगा, पिता उसे खून से लथपथ हालत में गोद में लेकर अस्पताल भागे।