भगवान कार्तिकेय ने षष्ठी तिथि को तारकासुर का किया था वध
आज 16 सितंबर 2026 को हिंदू पंचांग के अनुसार 2 खास पर्व मनाए जा रहे हैं स्कंद षष्ठी और बलराम जयंती दोनो ही पर्व का अपना अपना विशेष महत्व है। आज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है, बुधवार है, नक्षत्र विशाखा है।
स्कंद षष्ठी का व्रत
यह भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। भगवान शिव और माता पार्वती के बड़े पुत्र कार्तिकेय का दूसरा नाम स्कंद है।इस व्रत को पूरे भारत में सनातन लोग मनाते है मगर दक्षिण भारत मे ज्यादा लोग मानते है दूसरा गणेश जी के बडे़ भाई है और गणेश जी इस अवसर पर सपरिवार अपने भाई के घर आए हुऐ जहां उनकी आवभगत होती है पूरे 11दिन तक रुकते है इसी कारण गणेशोत्सव को रुप में मनाया जाने लगा है।
बलराम जयंती
आज भगवान कृष्ण के बड़े भाई दाऊ भैया भगवान बलराम का जन्मोत्सव भी है। इन्हें शेषनाग का अवतार माना जाता है और कृषि-बल के देवता के रूप में पूजा जाता है।
इन व्रत के पीछे मान्यता क्या है….?
स्कंद षष्ठी की मान्यता: कथा के अनुसार तारकासुर नाम के राक्षस ने वरदान प्राप्त कर देवताओं को परास्त कर दिया था। तब भगवान शिव के तेज से कार्तिकेय का जन्म हुआ और षष्ठी तिथि को उन्होंने तारकासुर का वध किया। इसलिए इस दिन को विजय के प्रतीक के -रूप में मनाया जाता है। संतान प्राप्ति और संतान की रक्षा के लिए यह व्रत बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
बलराम जयंती की मान्यता: बलराम जी को बल, अन्न और किसानों का देवता माना जाता है। उनके हल और मूसल के कारण खेती में समृद्धि आती है। मान्यता है कि इस दिन उनकी पूजा करने से घर में अनाज की कमी नहीं होती।
दोनो व्रत मे पूजन विधि कैसे करें….?
स्कंद षष्ठी पूजा–
सुबह स्नान कर भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या फोटो के सामने दीपक जलाएं। उन्हें फूल, फल, रोली और विशेष रूप से 6 दीपक अर्पित करें।
“ॐ स्कंदाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
व्रत रखने वाले लोग दिन भर फलाहार करें और शाम को कथा सुनकर व्रत खोलें।
बलराम जयंती पूजा–
भगवान श्रीकृष्ण और बलराम जी की संयुक्त पूजा करें। हल, अनाज और गाय को इस दिन पूजा में शामिल किया जाता है।कृषि यंत्रों और अनाज पर तिलक लगाकर समृद्धि की कामना करें।
इस पूजन से क्या लाभ मिलते हैं…?
संतान सुख के लिए स्कंद षष्ठी का व्रत करते है जिससे निःसंतान दंपत्तियों को संतान प्राप्ति होती है और बच्चों के रोग-दोष दूर होते हैं।
शत्रु पर विजय प्राप्त करने में यह व्रत कोर्ट-कचहरी और शत्रु बाधा से मुक्ति दिलाता है।
धन-धान्य में वृद्धि हेतु किसान बलराम जयंती पर पूजा करते मान्यता है कि इससे खेत में फसल अच्छी होगी और घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।
बल और स्वास्थ्य के लिए इस दिन बलराम जी की पूजा से शारीरिक बल और मनोबल दोनों बढ़ते हैं।

