जीवन में सुख-दुख, सफलता-असफलता का चक्र चलता रहता है। अक्सर हम अतीत की गलतियों, दुखों और असफलताओं को पकड़कर बैठे रहते हैं। इससे हमारा वर्तमान भी खराब होता है और भविष्य भी अंधकारमय लगता है।
“बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुध लेय” का अर्थ है कि जो बीत गया उसे भूल जाओ और आगे क्या करना है, इसकी चिंता करो। अतीत को हम बदल नहीं सकते, लेकिन भविष्य को हम अपने कर्मों से बेहतर बना सकते हैं।
अगर हम हर समय पुरानी बातों को याद करके पछताते रहेंगे, तो हम आगे बढ़ने की ऊर्जा खो देंगे। जो हुआ, उससे सीख लेना बुद्धिमानी है, लेकिन उसी में उलझे रहना मूर्खता है।
इसलिए जीवन का सही मंत्र यही है – अतीत से अनुभव लो, वर्तमान में जियो और भविष्य के लिए योजना बनाओ। जो व्यक्ति बीती बातों को भुलाकर आगे की सोचता है, वही जीवन में सफल होता है। खुश रहना है तो पीछे मुड़कर देखना छोड़ो और आगे की राह पर ध्यान दो।

