“समय और परिस्थितियां बदलती रहती हैं, समय तो बदल जाता है लेकिन बात रह जाती है, “इसलिए सुनाने के बजाय धैर्य से सुनें।”
समय कभी एक जैसा नहीं रहता। आज जो कठिन परिस्थिति लग रही है, कल वही बीत जाएगी। समय के साथ लोग बदल जाते हैं, जगह बदल जाती है, लेकिन हमारे बोले हुए शब्द हमेशा याद रहते हैं। गुस्से में या जल्दबाजी में कही गई एक बात रिश्तों में ऐसी दरार डाल सकती है जो समय भी नहीं भर पाता।
इसीलिए कहा गया है कि सुनाने से ज्यादा महत्वपूर्ण है सुनना। जब हम धैर्य से दूसरों को सुनते हैं, तो हम न सिर्फ उनके मन को समझते हैं बल्कि कई गलतफहमियों से भी बच जाते हैं। सुनना एक कला है। यह सामने वाले को सम्मान देता है और हमें सच्चाई तक पहुंचाता है।
अक्सर हम अपनी बात साबित करने की होड़ में दूसरे की बात काट देते हैं। हमें लगता है कि हम जीत गए, लेकिन असल में हम एक रिश्ता हार जाते हैं। समय बीतने के बाद हमें एहसास होता है कि उस वक्त चुप रहना और सुन लेना ही बेहतर था।
इसलिए जीवन में हमेशा धैर्य रखिए। समय बदलेगा, परिस्थितियां सुधर जाएंगी, लेकिन आपकी वाणी की मिठास और आपके सुनने का धैर्य हमेशा लोगों के दिल में रहेगा।

