मकड़ाई समाचार भोपाल। मध्य प्रदेश में आक्सीजन की किल्लत होने की एक वजह आक्सीजन का जरूरत से ज्यादा उपयोग भी बताया जा रहा है। अधिकतर अस्पतालों में मरीजों को तय मापदंड से ज्यादा आक्सीजन दी जा रही है। ऐसा मरीज के स्वजनों के दबाव या फिर अस्पताल के कर्मचारियों की नासमझी के कारण हो रहा है। इस व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि अस्पताल डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के मापदंडों का कड़ाई से पालन करने लगें, तो ऐसी नौबत फिर नहीं बनेगी। महाराष्ट्र से अचानक आक्सीजन की आपूर्ति रोके जाने के बाद पिछले हफ्ते प्रदेश में संकट खड़ा हो गया था। कई जिलों में कोरोना मरीजों की मौत आक्सीजन की कमी से होना बताई गई है। ऐसे में सरकार ने आनन-फानन में छत्तीसगढ़ के भिलाई इस्पात संयंत्र से आक्सीजन के लिए अनुबंध किया।
गुजरात और उत्तर प्रदेश स्थित कंपनियों से भी अतिरिक्त ऑक्सीजन मांगी गई। जैसे-तैसे कमी तो पूरी हो गई, पर ऑक्सीजन के जरूरत से ज्यादा उपयोग का सिलसिला बंद नहीं हुआ। स्वास्थ्य विभाग के सूत्र बताते हैं कि ज्यादातर अस्पताल कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन लगाने को लेकर स्वास्थ्य संगठन के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। संगठन अतिगंभीर मरीज (जिनके फेफड़े 60 फीसद से ज्यादा संक्रमित हो चुके हों और ऑक्सीजन सेचुरेशन 90 से कम हो) को 25 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन देने की बात करता है। जबकि अस्पताल मध्य संक्रमित मरीजों को भी इतनी ही ऑक्सीजन दे रहे हैं। जबकि उन्हें 15 लीटर ऑक्सीजन दी जानी चाहिए।
अधिकारियों का कहना है कि कई जगह ऐसे हालात सामने आए हैं और उन अस्पतालों को गाइड लाइन का पालन करने को कहा गया है। इन निर्देशों के बीच यह भी पता चला है कि अपने मरीज के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित स्वजन कई बार ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने के लिए अस्पताल कर्मचारियों पर दबाव बनाते हैं, तो कई बार कर्मचारी भी लापरवाही करते हैं। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान ने बताया कि दहशत में ऑक्सीजन का भंडारण भी किया जा रहा है। इस कारण बीच में स्थिति बिगड़ी है।

