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इंदौर: सिस्टम की लापरवाही से गई अकाउंटेंट की जान, एंबुलेंस में न ऑक्सीजन न हूटर सड़क हादसे में गंभीर घायल, 1 घंटे 15 मिनट बाद पहुंचा अस्पताल

मकडाई एक्सप्रेस 24 इंदौर। शहर में सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल निजी कंपनी के अकाउंटेंट अनिल चौहान की लापरवाही के चलते मौत हो गई। गुरुवार सुबह करीब 10:45 बजे मांगलिया टोलनाका के पास ईंट से भरे मिनी ट्रक ने अनिल की बाइक को टक्कर मार दी।

जयश्री नगर देवास निवासी 50 वर्षीय अनिल पिछले 15 साल से जंजीरवाला चौराहे स्थित बिल्डिंग मटेरियल कंपनी में नौकरी कर अपडाउन कर रहे थे।

पहले निजी अस्पताल, फिर पुलिस चौकी के चक्कर

हादसे के बाद राहगीरों ने अनिल को तुरंत मांगलिया स्थित गुर्जर निजी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टर ने हालत गंभीर देखकर उन्हें एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन उन्हें मांगलिया पुलिस चौकी ले गए और 108 एंबुलेंस बुलाने की मांग की।

एंबुलेंस में नहीं थी कोई जरूरी सुविधा

परिजनों का आरोप है कि मौके पर पहुंची 108 एंबुलेंस में स्ट्रेचर के अलावा कुछ भी नहीं था। वाहन मे ऑक्सीजन नहीं थी।हूटर और हॉर्न खराब थे ।प्राथमिक उपचार की कोई व्यवस्था नहीं थी

परिजन ने बताया हालात

अनिल के साले देवेंद्र वर्मा ने बताया कि उन्होंने चालक से निजी अस्पताल ले जाने की मांग की, लेकिन चालक ने मना कर दिया और कहा कि वह सिर्फ एमवाय अस्पताल ही जाएगा।

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भारी ट्रैफिक में रेंगती रही एंबुलेंस, 20 मिनट पहले तोड़ दिया दम

हूटर न होने की वजह से एंबुलेंस भारी ट्रैफिक में फंस गई। एमवाय अस्पताल पहुंचने में करीब 1 घंटा 25 मिनट लग गए। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि अनिल ने अस्पताल पहुंचने से करीब 20 मिनट पहले ही दम तोड़ दिया था। डॉक्टरों का कहना था कि थोड़ी देर पहले पहुंचा दिया जाता तो शायद जान बच सकती थी।

परिवार का आरोप – समय पर इलाज मिलता तो बच जाती जान

अनिल के परिवार में बेटा ध्रुव चौहान है। परिवार की पूरी जिम्मेदारी अनिल पर थी। देवेंद्र वर्मा ने कहा कि अगर गुर्जर अस्पताल में भर्ती कर लिया जाता या एंबुलेंस समय पर पहुंचती तो अनिल की जान बच सकती थी।

पुलिस ने बताया

मांगलिया चौकी प्रभारी सत्येंद्र सिंह सिसोदिया ने कहा कि परिजन सीधे अस्पताल ले गए थे और गुर्जर अस्पताल में भर्ती करने की व्यवस्था नहीं है।

सवालों में घिरी 108 सेवा

इस घटना के बाद एक बार फिर 108 एंबुलेंस सेवा की तैयारियों पर सवाल उठे हैं। बिना ऑक्सीजन, बिना हूटर और बिना प्राथमिक उपचार की एंबुलेंस से गंभीर मरीजों को ले जाना उनकी जान जोखिम में डालने जैसा है।