भोपाल। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) को शासन, स्वास्थ्य और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में मध्यप्रदेश को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा देशभर में प्रस्तावित 58 एआइ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में से दो सेंटर मप्र में स्थापित होंगे। प्रत्येक सेंटर करीब 10 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में विकसित होगा, जहां शासकीय कार्यों में एआइ के नवाचार और समाधान विकसित किए जाएंगे। साथ ही चैट-जीपीटी जैसा स्वदेशी एआइ प्लेटफॉर्म भी तैयार किया गया है, जिसे फरवरी में नेशनल एआइ समिट से पहले लॉन्च किया जाएगा।
रिसर्च फैलोशिप शुरू- सीईओ इंडिया एआइ अभिषेक सिंह
मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस-2026 में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव एवं सीईओ इंडिया एआइ अभिषेक सिंह ने बताया कि एआइ से प्रदेश में लिए रिसर्च फैलोशिप शुरू की गई है, जिसका लाभ अब सभी विषयों के विद्यार्थी ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि भारत एआइ के क्रियान्वयन में वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है। अनुवाद के लिए ‘भाषिणी’ पोर्टल और देशभर में एआइ डेटा लैब्स विकसित की जा रही है। मप्र में 30 एआइ डेटा लैब्स बनने से लाखों युवाओं को डेटा एनालिस्ट के रूप में प्रशिक्षण मिलेगा।
हैकाथॉन विजेताओं को मिले पुरस्कार
कॉन्फ्रेंस में सीएम डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन सिंहस्थ-2028 के संचालन के लिए आयोजित उज्जैन महाकुंभहैकाथॉन और मप्र इनोटेक स्पर्धा के विजेताओं को पुरस्कृत किया। भोपाल स्मार्ट सिटी के बीनेस्ट इंक्यूबेशन सेंटर से निकले स्टार्टअप स्टारब्रू टेकसिस्टम्स के आशुतोष राय को पहला स्थान मिला है। इसमें देशभर से 1726 कंपनियों ने भाग लिया था।
वेक्टर बॉर्न बीमारियों का हो सकेगा फोरकास्ट
एमपी इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के एमडी आशीष वशिष्ठ ने बताया कि एआइ के उपयोग से शासन में पारदर्शिता और सेवा वितरण में सुधार होगा। एआई आधारित मॉडल से डेंगू, चिकनगुनिया जैसी वेक्टर बॉर्न बीमारियों और कुपोषणकी तीन महीने पहले ही भविष्यवाणी की जा रही है। डब्ल्यूएचओ मानकों के आधार पर कुपोषण फोरकास्टिंग से संभावित कुपोषित बच्चों की पहचान पहले ही हो सकेगी। एआई से फसल गिरदावरी और रोग प्रकोप की सटीक जानकारी भी मिलेगी।

