इंदौर : जैन साब सड़क किनारे बिस्तर बिछा गुजार रहे रातें, पेड़ों के लिए मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट से भिड़े
इंदौर। दिल्ली जैसे महानगरों में घटती ऑक्सीजन के चलते जहां सांसों का संकट गहरा रहा है। वहीं, जिन शहरों में थोड़ी बहुत हरियाली बची है वहां भी विकास योजनाओं के कारण पेड़ पौधों को नष्ट किया जा रहा है। इंदौर के रीगल चौराहे पर ऐसे ही 235 पेड़ पौधों को बचाने के लिए अब शहर के जागरूक लोग गांधीगिरी करने को मजबूर हैं। यहां जो विरोध प्रदर्शन हो रहा है, उसमें शहर के लोग अलग-अलग रूप से आकर पेड़ पौधों को बचाने के लिए अपनी हाजिरी दर्ज करा रहे हैं।
हजारों तोते गुजारते हैं पेड़ों पर रात
देश के स्वच्छ शहर इंदौर में फिलहाल ग्रीन कवर एरिया मात्र 9 पर्सेंट बचा है। इसके बावजूद शहर में विकसित किया जा रहे मेट्रो रेल नेटवर्क के कारण यहां बड़ी संख्या में पेड़ पौधों पर विकास की कुल्हाड़ी चल रही है। फिलहाल मेट्रो की जद में शहर के बीचो-बीच मौजूद रीगल चौराहे के वे हरे भरे पेड़ भी आ गए हैं, जिन पर शाम ढलते ही हजारों तोते रात गुजारते हैं।
पेड़ों को बचाने के लिए धरना
शहर में मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट पर रीगल चौराहा पर स्थित रानी सराय का यह क्षेत्र है, जहां पर अंडरग्राउंड मेट्रो के लिए स्टेशन प्रस्तावित किया गया है। फिलहाल यहां स्टेशन का काम शुरू हो गया है और यहां के 235 पेड़ पौधों पर संकट मंडरा रहा है। इस स्थिति में इन्हें बचाने के लिए जनहित पार्टी के अभय जैन ने इंदौर जिला प्रशासन के अलावा नगर निगम और मेट्रो रेल प्रबंधन से इन्हें बचाने की गुहार लगाई थी। इसके बावजूद भी जब कोई प्रभावी सुनवाई नहीं हुई तो पेड़ों के बीच में ही धरना देकर बैठ गए।
उनके साथ उनके कुछ सहयोगियों ने भी इन पेड़ पौधों और तोतों के आशियानों को बचाने के लिए उनके आंदोलन का समर्थन किया। जो उनके साथ मौके पर डटे हुए हैं। फिलहाल स्थिति यह है कि अब उनकी हरियाली बढ़ाने की मुहिम में शहर के ऐसे लोग भी शामिल हैं जो यहां किसी न किसी काम से आते हैं। लेकिन पेड़ पौधों को बचाने के लिए उनके अभियान को समर्थन देते हैं।

