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Budget 2022: बजट में रत्न और आभूषण उद्योग के लिए क्या-क्या होना चाहिए? GJEPC ने दी सिफारिशें

नई दिल्ली। रत्न और आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) ने सरकार से सोने पर आयात शुल्क को 7.5 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत करने और शिपमेंट को बढ़ावा देने के लिए आगामी बजट में इस क्षेत्र के लिए एक विशेष पैकेज देने का आग्रह किया है। अपनी बजट पूर्व सिफारिशों के रूप में परिषद ने कटे और पॉलिश किए गए हीरों पर आयात शुल्क में कमी का भी सुझाव दिया है। GJEPC का कहना है कि काटे और पॉलिश किए गए कीमती तथा अर्ध-कीमती रत्नों पर आयात शुल्क 7.5 प्रतिशत से 2.5 प्रतिशत तक किया जाए

परिषद ने एक बयान में कहा, “अगर (सोना) 4 प्रतिशत शुल्क दर पर आयात किया जाता है तो 500 करोड़ रुपये के बजाय 225 करोड़ रुपये की कार्यशील पूंजी अवरुद्ध होगी।” परिषद के अन्य सुझावों में मुंबई में विशेष अधिसूचित क्षेत्र में कच्चे हीरों की बिक्री की अनुमति देने के लिए कराधान प्रावधानों में संशोधन भी शामिल है।

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जीजेईपीसी के अध्यक्ष कॉलिन शाह ने कहा कि भारत रत्न और आभूषण का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है, जो वैश्विक रत्न और आभूषण निर्यात में 5.8 प्रतिशत का योगदान देता है। उन्होंने कहा, “हम इस क्षेत्र में (चालू वित्त वर्ष में) 41 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य हासिल करेंगे। जब भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा, तब हमारा अब 100 बिलियन अमरीकी डालर का निर्यात हासिल करने का लक्ष्य होगा।

शाह ने कहा, “इसी को (ऊपर बताए गए निर्यात लक्ष्य) किकस्टार्ट देने के लिए हम सरकार से आगामी केंद्रीय बजट में इस क्षेत्र के लिए एक विशेष पैकेज की घोषणा करने की अपील करते हैं।” उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने का एकमात्र तरीका नीतिगत सुधार है, जो हमें वैश्विक बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बना देगा।

उन्होंने कहा, “हमने कटे और पॉलिश किए गए हीरे पर आयात शुल्क कम करने का अनुरोध किया है, मुंबई में विशेष अधिसूचित क्षेत्र में कच्चे हीरे की बिक्री की अनुमति मांगी है… इससे न केवल भारतीय हीरा उद्योग को दुनिया में हीरे के सबसे बड़े उत्पादक के रूप में बने रहने में मदद मिलेगी बल्कि हमें सबसे बड़ा हीरा व्यापार केंद्र बनने में भी मदद मिलेगी।”