Delhi Police Action: संवैधानिक पदों को निशाना बनाने वाले “आपत्तिजनक” पोस्ट पर कार्रवाई, X से मांगा यूजर्स का पूरा डेटा,CJP आंदोलन के दौरान PM और मंत्रियों पर अभद्र पोस्ट की जांच
मकडा़ई एक्सप्रेस 24 नई दिल्ली । दिल्ली पुलिस ने CJP यानी Cockroach Janata Party के नेतृत्व में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री और अन्य केंद्रीय मंत्रियों को निशाना बनाने वाले “आपत्तिजनक और अवैध” सोशल मीडिया पोस्ट पर कार्रवाई शुरू की है। पुलिस ने कई सोशल मीडिया अकाउंट्स को नोटिस भेजे हैं और प्लेटफॉर्म X से ऐसे यूजर्स का पूरा डेटा रिकॉर्ड मांगा है।
क्या है पूरा मामला….?
दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम ने 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर हुए CJP प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद अपलोड किए गए कंटेंट की समीक्षा की। जांच में पाया गया कि कई पोस्ट में PM नरेंद्र मोदी और मंत्रियों के खिलाफ अभद्र भाषा, फर्जी खबरें और डीपफेक वीडियो सर्कुलेट किए गए। पुलिस का कहना है कि ऐसे पोस्ट कानून का उल्लंघन हैं और सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। इसी आधार पर पुलिस ने IT एक्ट के प्रावधानों के तहत प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट हटाने के नोटिस भेजे हैं।
X को भेजा नोटिस पूरा यूजर डेटा मांगा
दिल्ली पुलिस ने X को औपचारिक नोटिस भेजकर जांच के दायरे में आए अकाउंट्स का विवरण मांगा है। मांगी गई जानकारी में शामिल हैं। रजिस्ट्रेशन डिटेल मतलब मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी
– अकाउंट बनने के बाद से सभी एक्टिव सेशन के IP एड्रेस और पोर्ट डिटेल
– संदिग्ध को ट्रेस करने में मददगार कोई भी डेटा
पुलिस ने यह नोटिस BNSS की धारा 94 के तहत भेजा है, जिसके तहत जांच के लिए किसी भी व्यक्ति या संस्था से दस्तावेज/डिवाइस मांगे जा सकते हैं।
पाकिस्तान से जुड़े 480 अकाउंट्स की भी जांच
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान 480 से ज्यादा पाकिस्तान से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल भी सक्रिय पाए गए। ये अकाउंट्स प्रदर्शन से जुड़ी फर्जी कहानियां, अफवाहें और डीपफेक वीडियो फैला रहे थे। पुलिस इन हैंडल्स के IP एड्रेस की भी जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक ये वही अकाउंट्स हैं जो “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान भी एक्टिव थे।
CJP प्रदर्शन और उसके बाद क्या हुआ…?
CJP के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन की शुरुआत NEET से जुड़े मुद्दों को लेकर हुई थी। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर मार्च करने से रोकने पर झड़प हुई जिसमें कई छात्र और सुरक्षाकर्मी घायल हुए।
25 जुलाई को आंदोलन समाप्त हुआ। इसके बाद केंद्र ने CJP की प्रमुख मांगें मानीं, जिनमें प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस लेना और NEET अभ्यर्थियों के आत्महत्या करने वाले परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा देना शामिल है।
कानूनी और गोपनीयता पर सवाल
इस कार्रवाई पर डिजिटल अधिकार संगठन *Internet Freedom Foundation* ने चिंता जताई है। IFF का कहना है कि “अकाउंट बनने के बाद से सभी सेशन का IP डेटा” मांगना अनुपातहीन है और इससे आलोचकों, पत्रकारों और व्हिसलब्लोअर्स की निजता को खतरा हो सकता है। संगठन का मानना है कि ऐसे व्यापक डेटा अनुरोध सुप्रीम कोर्ट के पुट्टास्वामी जजमेंट में दिए गए “आवश्यकता और अनुपातिकता” के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं। 6853
पुलिस ने रखा अपना पक्ष
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “आपत्तिजनक और अवैध कंटेंट को हटाने की प्रक्रिया लगातार जारी है”। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम 24×7 प्लेटफॉर्म्स पर नजर रख रही है ताकि प्रदर्शन से जुड़े आपत्तिजनक पोस्ट की पहचान कर कार्रवाई की जा सके।
नई बहस हमारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता क्या…?
दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई CJP आंदोलन के बाद सोशल मीडिया पर हुई बहस को नियंत्रित करने की दिशा में बड़ा कदम है। एक तरफ पुलिस कानून-व्यवस्था और फर्जी सूचना रोकने की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ डेटा मांगने के तरीके पर निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस शुरू हो गई है।

