बड़वानी। बिजली विभाग की फर्जी वसूली, सोसायटियों से खाद का गायब होना और बाजार की खुली लूट को लेकर संकटग्रस्त आदिवासी किसानों ने गुरुवार को पाटी में प्रदर्शन किया। किसानों ने कहा कि यह सिर्फ लक्षण हैं, असली बीमारी सरकार की नीतियां और एमएसपी पर धोखा है। इस प्रदर्शन में जागृत आदिवासी दलित संगठन के नेतृत्व में पाटी के गांवों के आदिवासी किसान शामिल हुए।
इस दौरान आक्रोशित किसानों और बिजली व खाद विभाग के अधिकारियों के बीच लंबी बहसबाजी चली। किसानों ने अपनी समस्याओं के संबंध में ज्ञापन भी सौंपा। वहीं किसानों ने स्पष्ट किया कि बिना मीटर के फर्जी बिल नहीं भरे जाएंगे। मीटर के हिसाब से ही बिल भरा जाएगा। जागृत आदिवासी दलित संगठन के हरसिंग जमरे, बलराम सस्ते आदि ने बताया कि खरीफ की फसल पहले सूखे और फिर बेमौसम बारिश से चौपट हुई है। इससे उपज बेहद कम रही। वहीं जो फसल पकी थी, उसका बाजार में भाव नहीं मिला। पाटी के किसान इस साल कमाई नहीं सिर्फ कर्ज बढ़ा हैं। कर्ज से उबरने के लिए किसान इस समय रबी सीजन की बोवनी में मेहनत कर रहे, लेकिन अब भी कई तरह की मार सहना पड़ रही है। पाटी ब्लॉक में बिजली सप्लाई ठीक से नहीं हो रही है। जिससे खेतों में सिचाई नहीं हो पा रही। बिजली के लिए परेशान किसानों की बेचैनी का फायदा उठाते हुए विभाग उनसे मनमाना घरेलू बिल वसूलने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा गेहूं-चने के लिए जरुरी यूरिया और डीएपी खाद के संकट ने किसानों को खेतों से उजाड़ कर सोसाइटियों के लाइनों में खड़ा कर दिया है।
10 घंटे की घोषणा, मिल रही 3-4 घंटे मिल रही बिजली
ग्रामीण किसानों ने कहा कि पाटी तहसील में थ्री फेज सप्लाई लगातार खराब है। बिजली रात को दी जा रही है और वह भी इतनी कमजोर वोल्टेज के साथ कि मोटर लोड तक नहीं पकड़ पाती। पानी खेत तक पहुंच नहीं पाता। 10 घंटे की घोषित सप्लाई में किसान मुश्किल से 3-4 घंटे ही सिंचाई कर पाते हैं। इसके अलावा लाइन में 8-10 बार कटौती भी झेलने किसान मजबूर है। ऊपर से बिजली विभाग द्वारा आदिवासी किसानों को अनुमानित खपत के नाम पर फर्जी बिल दिए जा रहे हैं। बिना मीटर के 100 यूनिट की खपत दिखाकर 100 रुपए वसूले जा रहे है। जबकि सरकारी सब्सिडी आदेश साफ कहता है कि 30 यूनिट तक सिर्फ 25 रुपए का बिल बनता है। कई किसानों से बिना बिल और बिना रसीद के अवैध वसूली की गई है और बिल नहीं भरने पर घर की बिजली काटने की धमकियाँ दी जा रही हैं। किसानों ने मांग की हैं कि सिंचाई के लिए 10 घंटे बिजली दी जाए और सोसायटी में पर्याप्त खाद उपलब्ध कराई जाए। अनियमितता करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए, अन्यथा किसान आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

